चहुंमुखी विकास के दावे कैसे होगे सच प्रतिनिधित्व की नीतियां हो रही विशेष

चहुंमुखी विकास के दावे कैसे होगे सच प्रतिनिधित्व की नीतिया हो रही विशेष

सन्त कबीर नगर - भावी प्रत्याशियो की लाइन मे लगे नेताओ की मौकापरस्त बयानबाजिया हो रही है |अवसर मिलने के बाद कोई चहुंमुखी विकास होने वाला नही है और न ही सबका साथ सबका विकास जैसी नीतियो का अनुसरण होने वाला है | विकास उसी तरह के होगे जैसे चुनाव लड़े जायेगे | भला जो प्रत्याशी जातिगत समीकरण बनाने पर लगा है बिरादरवाद को बल देने पर लगा है , वोटरो को पार्टी विशेष का मोहर लगाने पर लगा है क्या ऐसे भावी प्रत्याशी जनहितैषी कार्य कर सकते है ? 
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव की तैयारी मे लगे राजनैतिक दलो के भावी प्रत्याशियो द्वारा जमकर कूटनीति का अनुसरण किया जा रहा है , चहुंमुखी विकास का चादर ओढ़ कर जातिगत नीतियो का सहारा लिया जा रहा है विरादरवाद एवं पार्टी विशेष का मोहर लगाया जा रहा है ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मौका पाने पर सबका साथ सबका विकास के मुहाने पर विधानसभा क्षेत्रो का चहुंमुखी होना सम्भव है ? यही नही सवाल यह भी उठता है कि जब एक ही विधानसभा क्षेत्र से एक ही पार्टी से बेहतर उम्मीदवारी का होड़ लगा कर पार्टी की बेहतर नीतियो के आगोश मे बैठ कर " मन का गाठ " जैसी क्रिया के हवाले होकर टिकट के दावे किये जा रहे है तब सद्भावना के रथ पर आरूढ़ होकर कैसे विकास के वितान ताने जायेगे ?

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