कैशलेश स्वास्थ बीमा योजना मे बेसिक शिक्षको के साथ नीतिगत सौतेला व्यवहार = रीना त्रिपाठी

कैशलेश स्वास्थ बीमा योजना मे बेसिक शिक्षको के साथ नीतिगत सौतेला व्यवहार = रीना त्रिपाठी

लखनऊ = बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलो के शिक्षको , शिक्षामित्रो , अनुदेशको व कर्मचारियो के लिए भी उत्तर प्रदेश के अन्य सरकारी कर्मचारियो की तरह जीरो बैलेंस सामूहिक बीमा योजना लागू की जानी चाहिए ।
जैसा की सर्वविदित है परिषदीय वा माध्यामिक स्कूलो के शिक्षको , शिक्षामित्रो अनुदेशको व अन्य कर्मचारियो को प्राइवेट बीमा कंपनी की निविदा के आधार पर प्रस्तावित बीमा प्रीमियम की राशि जो वो तय करेंगे उसी के आधार पर प्रीमियम देकर बीमा कराना होगा । प्रीमियम की जो धनराशि चुनेंगे उसी के आधार पर  निश्चित होगा की परिवार के दो सदस्य दो बच्चे और माता पिता जिसको आप नामित करेंगे उसका बीमा सुनिश्चित होगा और उसकी किस्त आपको देनी होगी ।
बीमा धारकों का कार्ड बनेगा जिससे पूरी प्रदेश मे किसी भी अस्पताल मे  इलाज कराया जा सकता है । बीमा का हर साल नवीनीकरण होगा यानी कि यह फिक्स नही है । 
उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारियो की बात की जाए या प्राइवेट संस्थाओ मे काम करने वाले कर्मचारियो की सभी को कर्मचारी होने के आधार पर कंपनी द्वारा या सरकार द्वारा बीमा की सुविधा प्रदान की जाती है यदि नौकरी के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना होती है या किसी गंभीर बीमारी से कर्मचारी ग्रसित होता है तो उसका इलाज सरकार कैशलेस चिकित्सा पद्धति के द्वारा कराती है । इसमे कर्मचारियो का एक कार्ड बनता है जिस कार्ड के आधार पर वह अपना इलाज किसी भी अस्पताल में करा सकता है ।
यदि यदि पूरे प्रदेश मे कैशलेस चिकित्सा पद्धति बिना कर्मचारियों के बीमा दिए लागू की जा सकती है तो सिर्फ बेसिक शिक्षको के साथ दोहरा व्यवहार क्यो क्यो ?
प्रदेश भर के सभी शिक्षको की मांग है कि उन्हे कैशलेस इलाज की सुविधा सरकार के संरक्षण मे दी जाए और प्रीमियम वसूलने के दुष्चक्र से उन्हे मुक्त किया जाए । शिक्षक संगठन इस दोहरी नीति का विरोध कर रहे है । पिछले दिनो प्रकाशित की गई यह निविदा जिसमे तीन , पांच , सात व दस लाख रुपए की बीमा दरे मांगी गई है का विरोध कर रहे है ।
इसके पहले भी शिक्षा परिषद के कर्मचारी 87 रूपए सामूहिक बीमा कटवा रहा है जिसकी कटौती तो हो रही है पर वह पैसा कहां जा रहा है इसका हिसाब देने से सरकार और विभाग दोनो कतरा रहे है ।
शिक्षक मानसिक और शारीरिक रूप से निश्चिंत होकर अपना पूरा ध्यान पठन - पाठन और शैक्षिक गुणवत्ता मे लगा सके इसके लिए आवश्यक है कि उन्हे सरकारी संरक्षण मिले और निशुल्क कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाए ।


रीना त्रिपाठी
अध्यक्ष - उत्तर प्रदेश महिला प्रकोष्ठ - सर्वजन हिताय संरक्षण समिति , उत्तर प्रदेश

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