पत्रकारिता का सीमित होता दायरा !
पत्रकारिता का सीमित होता दायरा !
सन्त कबीर नगर - जनपद मे पत्रकारिता का हाल कुछ ठीक नही चल रहा है इसकी स्वतंत्रता से लेकर मौलिक अधिकार का हनन किया जा रहा है । कभी चुनावी खबर संकलन मे प्रेस पास देने मे सौतेला व्यवहार किया जा रहा है तो कभी अभद्र व्यवहार किया जा रहा है ।
बताते चले कि जनपद के समस्त " खलीलाबाद , सेमरियावा , बेलहर कला , सांथा , मेहदावल , बघौली हैसर , पौली , नाथ नगर " विकास खण्डो पर हो रहे ब्लाक प्रमुख पद के उम्मीदवारी नामांकन के दिन पत्रकारो के साथ दुर्व्यवहार किया गया । प्राप्त जानकारी के मुताबिक विकास खण्ड सांथा मे जहां खबर संकलन हेतु पहुंचे मीडिया कर्मियो को अन्दर जाने से रोक दिया गया वही विकास खण्ड खलीलाबाद मे मीडिया कर्मियो को बाहर कर दिया गया । इससे पहले निकाय चुनाव पुनर्मतगणना व त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव मे प्रेस पास मे सौतेला व्यवहार किया गया । यही नही इससे पूर्व भी प्रभारी मंत्री के दौरे पर संयुक्त जिला चिकित्सालय निरीक्षण के दौरान मीडिया कर्मियो को खबर संकलन से रोक दिया गया था । ऐसे मे यह कहना कोई गलत नही होगा कि पत्रकारिता का दायरा सीमित होता जा रहा है । जो एक लोकतांत्रिक देश मे ठीक नही है । पत्रकारिता के स्वतंत्रता व निष्पक्षता पर कुठाराघात है जो लोकतंत्र को प्रभावित करने वाला है ।
उल्लेखनीय है कि देश के चार स्तंभो मे से पत्रकारिता का मूल उद्देश्य शासन - प्रशासन सहित समाज आदि मे देश की अखण्डता , भाईचारा , समानता , राष्ट्र हित , नैतिक अधिकारो सहित उन तमाम चीजो पर पैनी निगाह रखता है जिससे राष्ट्र का राष्ट्रवासियो का व राष्ट्र का विकास प्रभावित न हो । तथा कब और क्या हो रहा है और क्यो हो रहा है के मूलभूत परिणामो को देखता है । जिसके लिए जान को जोखिम मे भी डाला जाता है ।
अनुच्छेद 19 ( 1 ) ( क ) मे " जानने का अधिकार " भी शामिल है इसमे सरकार के संचालन से सम्बन्धित सूचनाये जानने का अधिकार भी आता है केवल आपवादिक मामले मे जब देश की सुरक्षा अथवा लोकहित मे आवश्यक हो तभी उनका प्रकटीकरण नही किया जा सकता है । लोकतांत्रिक सरकार एक खुली सरकार होती है जिसके विषय मे जानने का अधिकार होता है। लोकहित के महत्व की बातो का प्रकाशन करने का समाचार पत्रो को पूर्ण अधिकार है । प्रेस आम नागरिक की ओर से उससे सम्बन्धित व सार्वजनिक हित से जुड़े मामलो को उद्घाटित करके लोकतंत्र को मजबूत करता है ।
हालांकि पत्रकारिता की कुछ सीमाये है जिसमे धर्म , जाति , जन्म स्थान , आवास , भाषा इत्यादि के आधार पर विभिन्न वर्गो के बीच शत्रुता बढ़ाना , राष्ट्रीय अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले आरोप का कथन , किसी चुनाव के सम्बन्ध मे गलत सूचना लिखना , अश्लील पुस्तको आदि की बिक्री , अल्प वयस्क को अश्लील वस्तुओ की बिक्री , धार्मिक भावनाओ का उभारना आदि असंवैधानिक है ।