जीवन मृत्यु नही निर्वाण है - महंथ विचार दास
जीवन मृत्यु नही निर्वाण है - महंथ विचारदास
सन्त कबीर नगर - कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान की अस्सी वर्षीय वालिदा रहीमुन्निशा की एकाएक इंतकाल की खबर सुनकर सांत्वना देने पहुंचे महंथ विचार दास ने कहा कि जीवन मृत्यु नही निर्वाण है इसके लिए शोक नही दुआ होनी चाहिए खुदा उन्हे जन्नत नसीब करे ।
बता दे कि अस्सी वर्षीय माता रहीमुन्निशा के एकाएक इंतकाल से कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान का पूरा परिवार सदमे मे है । जानकारी होने पर कबीर मठ मगहर के महंथ विचार दास गमजदा परिवार से मिलने उनके गांव बरगदवां कला पहुंचे । इस दौरान उन्होने गम से ऊपर उठने की बात कही । उन्होने कहा कि " जा मरने से जग डरे , मेरो मन आनंद । कब मरिहौ कब पाईहौ , पूरन परमानंद " यह पंच भौतिक शरीर नश्वर है इसके लिए शोक नही करना चाहिए । दुनिया को बनाने वाले उस खुदा से दुआ करनी चाहिए कि जिस रहमोकरम से दुनिया के सबसे उम्दा मानव जीवन देकर हमे नवाजा है वह रहमोकरम आगे भी बना रहे । यादो मे जाते हुए डबडबी आंखो मे कंपनी निदेशक ने कहा कि मां के दुआओ मे खुदा की रहमत होती है हम भाई बहनो के उज्जवल भविष्य के लिए अम्मीजान ने जो दुआये कि उसे खुदा ने हमेशा सुना और अपने रहमोकरम से नवाजा । दुआओ के साथ हमारी अम्मीजान हमारे साथ है ।