जनपद का घटा साक्षरता प्रतिशत हुआ छाछठ दशमलव सात ( 66.7 % )

जनपद का घटा साक्षरता प्रतिशत हुआ छाछठ दशमलव सात

सन्त कबीर नगर - जीवन सफलता और बेहतर जिन्दगी की सौगात देने वाला, बौद्धिक विकास के साथ - साथ सामाजिक और आर्थिक विकास मे योगदान देने वाला , सभ्य समाज का निर्माण कर उच्च व्यक्तित्व देने वाला प्रदेश का बढ़ता तिहत्तर प्रतिशत साक्षरता जहां घटकर सड़सठ दशमलव सात ( 67.7% ) हो गया है़ वही जनपद का बढ़ता उनहत्तर प्रतिशत (69.0% ) साक्षरता घटकर छाछठ दशमलव सात (66.7% ) हो गया है़ । प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतिशत मे आयी गिरावट मे ग्रामीण क्षेत्र काफी प्रभावित हुआ है़ । प्रदेश स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र की वर्ष पूर्व अड़सठ दशमलव आठ प्रतिशत ( 68.8 ) की जगह वर्तमान मे पैंसठ दशमलव पांच प्रतिशत ( 65.5% ) हो गया है़ । नगरीय साक्षरता भी अछूता नही रहा चौरासी दशमलव एक ( 84.1% ) की जगह पचहत्तर दशमलव एक प्रतिशत ( 75.1% ) हो गया है़ । बाकी स्त्री की साक्षरता सत्तावन दशमलव दो प्रतिशत ( 57.2% ) और पुरुष की साक्षरता सतहत्तर दशमलव तीन प्रतिशत ( 77.3% ) यथावत कायम है़ । 
बताते चले कि प्रदेश की योगी सरकार जब सत्ता मे आयी थी तब जनपद का साक्षरता प्रतिशत उनहत्तर प्रतिशत ( 69.0% ) के साथ बढ़त की ओर था । स्वतंत्रता काल की बारह प्रतिशत (12.0% ) को कोसो पीछे छोड़ते हुए दिन ब दिन बढ़त के साथ उनहत्तर प्रतिशत ( 69.0% ) साक्षरता सफलता के मुकाम छू रहा था लेकिन योगी सरकार के 2017 मे सत्तासीन होने के वर्ष बाद घटकर छाछठ दशमलव सात प्रतिशत ( 66.7%) हो गया । जबकि आधुनिक युग की नजर से देखा जाय तो साक्षरता प्रतिशत घटना नही चाहिए । क्यो कि इस आधुनिक युग मे शिक्षा के इतने संसाधन हो गये है़ कि अब गरीब से गरीब घर का कोई एक सदस्य भी निरक्षर नही रह सकता है़ सरकारो द्वारा सहयोगार्थ लाभकारी योजनाओ का काफी हद तक संचालन किया जा रहा है़ ।
उल्लेखनीय है़ कि देश को समृद्धशाली एवं आम जनमानस को सभ्य समाज के साथ शिक्षा और विकास पथ की ओर अग्रसर करने के मद्देनजर साक्षरता से वंचित गरीब आदि अन्य तबको को साक्षर बनाने के कदम मे 5 मई 1988 मे प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा राष्ट्रीय साक्षरता मिशन का शुभारंभ किया गया था । यह कदम 1951 मे देश की 30 करोड़ निरक्षर संख्या के साथ 1981 मे बढ़े 44 करोड़ के साथ गम्भीर दशा को देखकर किया गया था । मुख्य बल ग्रामीण क्षेत्रो विशेषकर महिलाओ तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के निरक्षरों पर दिया जाना था । साक्षरता की प्रचार व प्रसार की राष्ट्र के 5 तकनीकि विषयो मे से एक माना गया था । जिससे तकनीकि व विज्ञान की खोज का लाभ समाज के उपेक्षित वर्गो को भी मिल सके । राष्ट्रीय साक्षरता मिशन एक समाजिक मिशन है़ ।

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