स्वच्छता शुद्ध वातावरण सद्गुण और स्वस्थ जीवन देता है़ - के सी मिश्रा

स्वच्छता शुद्ध वातावरण सद्गुण और स्वस्थ जीवन देता है - के सी मिश्रा

सन्त कबीर नगर - स्वस्थ जीवन को जितनी जरूरत शुद्ध खानपान और शुद्ध वातावरण की होती है़ उससे कही अधिक उसके सूक्ष्मतम महत्ता को जानने की और ग्रहण करने की जरूरत है़ इसे सिर्फ जन जागरूकता की जरूरत मे नही देखना चाहिए । उक्त बाते स्वच्छता की गंभीरता मे स्वच्छ भारत मिशन ( ग्रामीण ) के जिला सलाहकार के सी मिश्र ने कही । उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले मे शौच मुक्त अभियान मे हर किसी की जिम्मेदारी निहित है इसे सिर्फ अभियान का हिस्सा नही मानना चाहिए । जो लोग इतर होकर मुंह मोड़ते है़ दरअसल वो स्वच्छता को जानते ही नही है़ । इसकी परिभाषा सिर्फ साफ - सफाई तक सीमित नही है़ व्यावहारिक आचरण , आध्यात्मिक गुण तक मे इसको परिभाषित होते देखा जा सकता है़ इसका सम्बन्ध मन से भी है़ और तन से भी है़ । इसका सम्बन्ध हर किसी के जन्म से है उन्होने कहा कि स्वच्छता की जरूरत सिर्फ शुद्ध वातावरण के लिए ही नही मानना चाहिए इसका सम्बन्ध जब सद्गुण से होता है तब हमारे अन्दर सत्य , अहिंसा , क्षमा , शान्ति इत्यादि गुण दिखाई देने लगते है क्यो कि सूक्ष्म रूप ये उक्त गुणो मे निहित है़ जब इसका सम्बन्ध मन से होता है़ तब सद्भावना का उदय होता है़ प्रेम का आविर्भाव होता है़ जब इसका सम्बन्ध शरीर से होता है़ तब नियमित स्नान , नियमित साफ - सुथरा वस्त्र , शुद्ध खान - पान किया जाता है़ और जब इसका सम्बन्ध वातावरण से होता है़ तब घर - दुआर से लेकर गांव गढ़ी टोला - मोहल्ला की सफाई की जिम्मेदारी नजर आती है जिसे बहुतायत जगह देखा जा सकता है़ इसके ज्यादातर उदाहरण सोसायटियो मे देखने को मिलता है वहां का हर बाशिंदा यह ख्याल रखता है कि वहां की सड़को पर कागज का कही टुकड़ा भी दिखायी न दे अगर वहां किसी एक ने कागज का टुकड़ा फेक दिया तो दूसरा उठे चुपचाप उठाकर कुड़ादान मे डाल देता है । जब इसका सम्बन्ध समाज से होता है़ तब सामाजिकता की झलक देखी जाती है़ बुराई से लड़ना इसका वास्तविक रूप है इससे सिर्फ सभ्य समाज का निर्माण ही नही होता है बल्कि इंसानियत को भी बल मिलता है़ जब इसका सम्बन्ध प्रकृति से होता है़ तब बाग - बगीचे लगाये जाते है तरह - तरह के पेड़ पौधो के किस्मों को देखा जाने लगता है़ । सफाई जीवन को संवारता है कलेवर को संभालता है़ । इसकी कीमत जीवन से भी बढ़कर है ये अनमोल रत्न है ।
॥ स्वच्छता का जब तनेगा वितान । तब मिलेगा सुख समृद्धि का विहान ॥

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