एक होनी चाहिए
एक होनी चाहिए
सरकार !
हमारी बने
क्या - क्या खेल
खेले जाते है
कही पट
कही चित्त
कही कुछ
और पैंतरे
आजमाये
जाते है
विपक्ष की
भूमिका होती
बड़ी निराली
उसकी हर
निगहबानी
काली होती है
राग द्वेष की
भाषा से
दबे लहजे
होते है
वक्त की
हर घड़ी के
दामन मे
सत्तासीन की
खूबी सदा
जुबानो पर
तीखे शब्द
चेहरे पर
तंज लाते है
कमबख्त
जनता भी
नही जानती
बहूरूपिये के
इस खेल को
अपनी पार्टी
का लिए
तमगा !
बेतरतीब
वोट की
साजिश करते है
इन्हे इस
बात का
जरा भी
नही ख्याल
पार्टी सत्ता
राज्य की
केन्द्र की
होनी चाहिए