जन्मदिन

जन्मदिन 

जन्मदिन
मनाने की
जब एक 
लालसा बनी
तब जिम्मेदारियो की 
तनी चादर ने
एक आवाज दी
शिक्षा के आयाम मे
जिम्मेदारियो के
पयाम मे
कही नजर आते हो ? 
शिक्षा की खुमारी मे
बूढ़े मां बाप
भूल गये
जिम्मेदारियो की
दारोमदारी मे
ईमानदारी भूल गये
नौकरी मिली तो
उदासीनता को 
छूने लगे
परिवार परवरिश मे
ठिकाने ढूढ़ने लगे
कभी धर्म को
कभी कर्म को
जीवन का 
हिस्सा नही बनाया
जीवन के 
मायने मे कभी
शिक्षा को नही 
अपनाया
जन्मदिन से होते 
जिन्दगी के लम्हे 
जो कम
कभी मुक्त 
निगाहो मे
उसे नही बसाया
लक्ष्य भी बनते रहे
चादर भी तनते रहे
पर कभी वो
जीवन का हिस्सा
बन नही पाये
मानव जीवन हो
या उसकी 
उत्कृष्ट शिक्षा का पयाम
कभी लक्ष्य
उद्देश्य के
दामन मे
नही बैठाया
बिसराये फिरता रहा
मुरझाये तिलते रहा
मिला जो 
जिन्दगी का आयाम
उसे अंधकार मकां मे
ढूढ़ते रहा


जी एल वेदांती " कवि "

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