मनरेगा मजदूरो से भी कम है सोशल आडिट टीम सदस्यो का मेहनताना

मनरेगा मजदूरो से भी कम है सोशल आडिट टीम सदस्यो का मेहनताना

सन्त कबीर नगर - जाने किस प्रतिफल को जायज मानते हुए नीति नियम बनाकर सामाजिक अंकेक्षण के सदस्यो का मेहनताना दो सौ रुपया तय करके पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही के तहत सोशल आडिट करवाया जा रहा है जो आज के महंगाई के जमाने मे 204 रुपया मनरेगा मजदूरो से भी कम है । मात्र दो सौ रूपये के हिसाब से दो दिन का भौतिक सत्यापन व एक दिन का बैठक कार्य 600 रुपये मे करना होता है जिसमे उन्हे दूरी भी तय करनी पड़ती है । जो आज के महंगे मोटरसाइकिल से आवागमन कही न कही महंगा सौदा है जो दिन ब दिन महंगे होते पेट्रोल से चलता है । वही मनरेगा मजदूरी के 5 किलोमीटर दायरे के बाहर मजदूरो को 10 प्रतिशत मजदूरी अतिरिक्त देने की व्यवस्था है ।
उल्लेखनीय है कि गांव से शहरो की ओर पलायन को रोकने तथा लोगो को उनके गांव मे ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा मे भारत सरकार द्वारा लागू किये गये महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम 2005 लोगो के काम मांगे जाने पर रोजगार की गारण्टी विधिक रूप से प्रदान करता है इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियांवयन पारदर्शिता , जन सहभागिता एवं जवाबदेही के साथ सम्पन्न करना योजना से सम्बन्धित सभी अधिकारियो एवं कर्मचारियो का परम दायित्व है इस दिशा मे सोशल आडिट की महत्वपूर्ण भूमिका है । यही नही प्राक्कलन , निर्धारित प्रक्रिया ( laid down procedure ) तथा मितव्ययिता के आधार पर सामग्री क्रय की जांच हेतु इन्वाइस , बिलो , बाउचरो व अन्य सम्बन्धित अभिलेखो का सत्यापन । अभिलेखो का सत्यापन , कार्यो का सत्यापन की जिम्मेदारी भी है जो भ्रष्टाचार जैसे कृत्यो को रोकने मे अहम साबित होता है ।

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