आओ हम सोना छोड़ दे = अबदुल्लाह खान

आओ हम सोना छोड़ दे = अबदुल्लाह खान


सन्त कबीर नगर = आओ हम सोना छोड़ दे बहुत हो गया करवटे बदलते हुए । किसी के ऊपर न लगाए हम कोई तोहमत , हम गणतंत्र की दुवाओ से है नवाजे हुए । अगर हमारे अंदर ये विचार आये कि हम गरीब है लाचार है बेबस है तो सही मायने मे यही हमारा दुर्भाग्य है । जिस देश के लोगो को गणतंत्र के रूप मे पूर्वजो का आशीर्वाद प्राप्त हो जिस देश का संविधान  कदम दर कदम दुवा देता हो उस देश का कोई भी नागरिक न गरीब है न लाचार है न बेबस है । एसअ सम्प्रभुता संपन्न, समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतांत्रिक , गणराज्य मे समता , अखंडता के बीच अगर ऐसा कुछ दिखाई देता है सुनाई देता है तो निश्चित रूप से पूर्वजो के बलिदान को हम भूल रहे है । गणराज्य एक ऐसा देश होता है जहां के शासनतंत्र मे सैद्धांतिक रूप से देश का सर्वोच्च पद पर आम जनता मे से कोई भी व्यक्ति पदासीन हो सकता है इस तरह के शासनतंत्र को गणतंत्र , लोकतंत्र , प्रजातंत्र कहा जाता है ।
उस ईश्वर ने हमे मानव जीवन देकर जो सौभाग्य दिया है उसे हमारे पूर्वजो ने संवार कर गणतंत्र का आशीर्वाद दिया है अगर ऐसा जीवन दुर्भाग्य का रोना रोता है तो यह बड़े दुर्भाग्य की बात होगी । गणतंत्र दिवस स्वच्छंद जिंदगी का परिचायक है इसके दामन मे सफलताओ के पर लगे है । जो लोग अपनी नाकामी को छुपाने के लिए , देश , प्रान्त , भाषा , कानून व्यवस्था , जात - पात , धर्म को जिम्मेदार ठहराया करते है असल मे वे लोग लोकतंत्र की परिभाषा को नही जानते है । विकास किसी विशेष स्थान का मोहताज नही होता है । हम उन पिछड़ो एरिया सहित उन निर्जन स्थानो को भी विकास की धरोहर बना सकते है जहां सड़क , बिजली इत्यादि का अभाव है । जरूरत है हमे आत्मविश्वास के साथ पहल करने की । गोरखपुर स्थित गीडा , ग्रामीण क्षेत्र बरगदवा कला मे स्थापित रिलेक्सो डोमस्वेयर कम्पनी है जो विकास रोजगार नौकरी की पहचान बन गई है ।

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