बलिदान दिवस पर आयोजित संगोष्ठी मे याद किये गये भगत सिंह , राजगुरु एवं सुखदेव

बलिदान दिवस पर आयोजित संगोष्ठी मे याद किये गये भगत सिंह , राजगुरु एवं सुखदेव 

लखनऊ = शहीद ए आजम भगत सिंह , शिवराम राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवस पर  भारतीय नागरिक परिषद् के तत्वावधान मे आयोजित संगोष्ठी मे शहीदो का स्मरण किया गया और शहीदो के सपनो के भारत की आधारशिला देश के बड़े सार्वजानिक क्षेत्रो को निजी घरानो को कौड़ियो के मोल बेंचने के फैसले को सरकार से वापस लेने की मांग की गई । 
राणा प्रताप मार्ग स्थित हाइडिल फील्ड हॉस्टल मे आयोजित संगोष्ठी " शहीदो के सपनो का भारत - सार्वजानिक क्षेत्र का सशक्त योगदान " मे मुख्य वक्ता ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे थे ।
विशिष्ट वक्ता के तौर पर प्रदेश के वरिष्ठ कर्मचारी व शिक्षक संगठनो के पदाधिकारी , पल्लव मुखर्जी , एस एस निरञ्जन , आशीष यादव , जय प्रकाश , सुहेल आबिद , निशा सिंह , वाई०एन उपाध्याय , नौशाद अहमद , डी०के० मिश्रा , मोहम्मद इलियास , रेनू त्रिपाठी , ब्रजेश त्रिपाठी , अलोक श्रीवास्तव , कुलेन्द्र प्रताप सिंह , सुशील श्रीवास्तव , दीपक चक्रवर्ती ए०पी सिंह , अमर नाथ यादव , बी०एल कुशवाहा , एच०एन० मिश्रा , डॉ महेश दत्त शर्मा , शिक्षक प्रतिनिधी महेश मिश्रा , अनिल सिंह , राम सेवक शुक्ला , राघवेन्द्र सिंह , हरि शंकर मिश्रा द्वारा संबोधित किया ।
संगोष्ठी की अध्यक्षता भारतीय नागरिक परिषद् के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन महामन्त्री रीना त्रिपाठी द्वारा किया गया ।
मुख्य वक्ता शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह के स्मरण का अर्थ है हर क्षेत्र , हर दल और विचार मे घुसी जातीय विद्रूपताओ व् संकीर्णताओ को अपने व्यवहार से ख़त्म करना , दहेज़ , कन्या भ्रूण हत्या , स्त्री अपमान , अंध विश्वास , भगत सिंह की क्रांतिकारी ज्वालाओ मे भस्म करना है , स्मरण का सार्थक अर्थ यही है । उन्होंने कहा जहाँ भी अन्याय , जुल्म और अनाचार है उसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज भगत सिंह है । बड़े पैमाने पर मुनाफा कमा रहे सार्वजनिक क्षेत्रो भारत पेट्रोलियम , राष्ट्रीयकृत बैंको , एल आई सी , रेलवे , चंडीगढ़ व् दादरा नगर हवेली की बिजली वितरण कंपनियो आदि को निजी घरानो को बेंचने को शहीदो के सपनो के साथ कुठाराघात है इसी क्रम मे उन्होंने यह भी कहा कि भगत सिंह मजदूरो और किसानो का राज्य चाहते थे जबकि सार्वजनिक क्षेत्र बिकने से कारपोरेट घरानो का वर्चस्व स्थापित होगा । भगत सिंह ने कहा कि युद्ध छिड़ा हुआ है और यह युद्ध तब तक चलता रहेगा जब तक कि शक्तिशाली व्यक्ति भारतीय जनता और श्रमिको की आय के साधनो पर एकाधिकार जमाये रखेंगे । चाहे ऐसे व्यक्ति अंग्रेज पूंजीपति हो या सर्वथा भारतीय पूंजीपति । भगत सिंह ने कहा कि यह युद्ध न तो हमने प्रारम्भ किया है और न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त होगा । भगत सिंह ने कहा हम  गोरी बुराई की जगह काली बुराई को लाकर कष्ट नही उठाना चाहते । बुराइयाँ एक स्वार्थी समूह की तरह एक दूसरे का स्थान लेने के लिए तैयार रहती है ।  
वक्ताओ ने कहा कि बिजली , पानी , सड़क , बुनियादी जरूरतो और स्पेस रिसर्च व् डिफेन्स सेक्टर का निजीकरण भगत सिंह के विचारो के भारत से मेल नही खाता । इससे बेरोजगारी तो बढ़ेगी ही राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पैदा होगा । 
दौरान एच इन पांडेय , निशा सिंह , रेनू त्रिपाठी , सरोज बाला सोनी , सदुरूदीन राणा , कमलेश मिश्र , त्रिवेणी मिश्रा , महेंद्र राय , महेश मिश्रा , दीपक चक्रवर्ती , जवाहरलाल विश्वकर्मा , प्रथमेश दीक्षित , अनिल सिंह , रमेश सिंह , शिव प्रकाश दिक्षित आदि द्वारा संकल्प लिया गया कि व्यापक राष्ट्रहित मे सार्वजानिक क्षेत्र बचाओ - देश बचाओ अभियान चलाया जाएगा । 

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