प्रशासन ने रोका चौथे स्तम्भ " पत्रकारिता " का रास्ता !

प्रशासन ने रोका चौथे स्तम्भ " पत्रकारिता " का रास्ता !

सन्त कबीर नगर = जो प्रशासन लोक कल्याणकारी योजनाओ आदि के साथ लोगो के अधिकार की चिन्ता करता है उसके रक्षा का गौर करता है । आज वही प्रशासन मानो अपना दायित्व भूल गया है । वह भी उसके लिए जिसके माध्यम से लोक कल्याण कारी योजनाओ का प्रचार प्रसार करवा कर उसकी जवाबदेही वगैरह सुनिश्चित करता है और लोगो को पारदर्शिता के साथ लाभ पहुंचाने का काम करता है । जिसका उदाहरण कबीर मठ मगहर है जहां निरीक्षण के क्रम मे मुख्यमंत्री जी के दौरे मे स्थानीय मीडिया को खबर संकलन जैसे निष्पक्ष पत्रकारिता को प्रभावित करते हुए अधिकार से वंचित कर दिया गया ।
बताते चले कि देश के चार प्रमुख स्तंभो मे से एक स्तम्भ पत्रकारिता है जिसका मूल उद्देश्य देश की अखंडता भाईचारे समानता राष्ट्रहित नैतिक अधिकारो सहित उन तमाम तथ्यो पर पैनी निगाह होती है जिससे राष्ट्र का राष्ट्रवासियो का राष्ट्र के विकास के साथ कोई खिलवाड़ न कर सके , तथा कब क्या हो रहा है क्यो हो रहा है उसका परिणाम क्या होगा बतौर निष्पक्ष पत्रकारिता तले निगाह रखना होता है । जिसके लिए इन्हे जान पर भी खेलना पड़ जाता है । देखा जाय तो सेना की तरह देश के अंदर रहकर देश का सेवा किया जाता है ।
वही अगर मीडिया के अधिकार क्षेत्र की बात की जाय तो अनु० 19 ( 1 )(क) मे " जानने का अधिकार " भी है शामिल है इसमे सरकार के संचालन से संबंधित सूचनाये जानने का अधिकार भी आता है केवल आपावादिक मामले मे जब देश की सुरक्षा अथवा लोकहित मे आवश्यक हो तभी उनका प्रकटीकरण नही किया जा सकता है । लोकतांत्रिक सरकार एक खुली सरकार होती है जिसके विषय मे जानने का अधिकार होता है। लोकहित के महत्त्व की बातो का प्रकाशन करने का समाचार पत्रो को पूर्ण अधिकार है ।
ऐसे मे अधिकार सहित यह सवाल उठना लाजिमी है कि शासन द्वारा संचालित लोक कल्याणकारी योजनाओ के प्रचार प्रसार मे पत्रकारिता का भरपूर इस्तेमाल करने वाला प्रशासन किस अधिकार के तहत वी वी आई पी जैसे कार्यक्रम की जानकारी होने न पाये मद्देनजर रोक लगाते हुए पहुंचे हुए पत्रकारो को रोकने का काम किया गया ?

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