प्रधान के विरोधियो से सहमे मनरेगा मजदूर जीवन यापन हुआ प्रभावित !

प्रधान के विरोधियो से सहमे मनरेगा मजदूर जीवन यापन हुआ प्रभावित !


सन्त कबीर नगर ( सेमरियावा ) मनरेगा योजना चलाकर सरकार भले ही ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार मुहैया कराने की सुव्यवस्था कर दी । लेकिन उसके संचालन मे सम्बन्धित अधिकारियो की उदासीनता मनरेगा मजदूरो को रोजगार से कोसो दूर कर दिया है । विकास खण्ड के ऐसे तमाम ग्राम पंचायते उदाहरण बनकर सामने आई है जहां मनरेगा मजदूरो को रोजगार प्राप्त नही हुआ । 
उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2021_2022 के दरम्यान मनरेगा योजना की स्थिति बेहद खराब रही है । हजारो की संख्या मे मनरेगा मजदूर रोजगार गारंटी योजना का लाभ नही उठा पाये । अधिकारियो की उदासीनता सहित ग्राम प्रधान के विरोधियो के डर से सहमे मनरेगा मजदूरो को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ गया । जिसका उदाहरण ग्राम पंचायत पचपोखरिया है जहां के मनरेगा मजदूर ग्राम प्रधान के विरोधियो के डर से रोजगार प्राप्त नही कर पाये । ग्राम प्रधान मोहम्मद अशफाक की माने तो विरोधियो द्वारा परिवार तक को पीड़ित करने की वजह से मनरेगा योजना से कोई कार्य नही कराया जा सका । मनरेगा मजदूर भी डर गये जिसकी वजह से वे लोग भी काम का डिमांड नही कर सके । 
सोशल आडिट टीम बीआरपी बेचन राय द्वारा उपस्थित ग्रामीणो को सोशल आडिट के मूल उद्देश्यो को " हमारा पैसा हमारा हिसाब " मे जागरूक किया गया । ग्राम पंचायत पिपराहसनपुर मे भी रोजगार जिम्मेदारो के उदासीनता की भेंट चढ़ गई । मनरेगा मजदूरो को रोजगार न के बराबर रहा । लगभग 375 मानव दिवस का ही सृजन हो सका । प्रसादपुर की भी स्थिति भी बहुत ठीक _ ठाक नही कही जा सकती । मात्र 2641 मानव दिवस मे सक्रिय 115 मनरेगा मजदूर सिमट कर रह गये ।
बहरहाल सोशल आडिट के मूल उद्देश्य पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही के अनुपालन मे बतौर जन जागरूकता मे उक्त ग्राम पंचायतो सोशल आडिट बैठक संपन्न हुआ ।

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