विकास के मुद्दे पर चुनाव और दरकार मे प्राथमिकता !
विकास के मुद्दे पर चुनाव और दरकार मे प्राथमिकता !
सन्त कबीर नगर = विकास का मंजिल न जाने कितना दूर है कि उसके ठिकाने तक प्राथमिकता वाले जन प्रतिनिधियो को पहुंचने मे पांच साल का कार्यकाल भी कम पड़ जा रहा है ।
उल्लेखनीय है कि तमाम जन प्रतिनिधित्व और पांच साल के विकास के बाद भी विकास के मुद्दे पर होने वाले चुनावो का सिलसिला जारी है । जनपद के एक नगर पालिका के साथ सात नगर पंचायतो मे होने वाले नगर निकाय चुनाव मे एक बार फिर विकास की प्राथमिकता मे उम्मीदवारो द्वारा चुनाव लड़ा जा रहा है । चुनाव जीतने की कवायद मे लगे राजनैतिक पार्टियो एवं निर्दल प्रत्याशियो के दावे है कि वे प्राथमिकता की दृष्टि से चहुंमुखी विकास करेगे । इससे पूर्व के जीते हुए प्रत्याशियो के यही दावे थे । लेकिन चहुंमुखी विकास की प्राथमिकता की उक्त दृष्टि से देखा जाय तो राह चलने के लिए न सड़को की स्थिति ठीक है न जल निकासी मे साफ - सुथरी नालियो की व्यवस्था है न पात्र परिवार व्यक्तियो मे लाभकारी योजनाओ का दस्तक है और न ही अन्य विकासशील लाभकारी योजनाओ के बेहतर क्रियान्वयन के साथ उज्जवल भविष्य की जननी प्राथमिक स्तर के शिक्षा की दुरुस्त व्यवस्था है । जबकि कदो के विकास की प्राथमिकता की दृष्टि वाले जन प्रतिनिधित्व को देखा जाय तो एक ग्राम पंचायत से लेकर क्षेत्र पंचायत के गलियारे से गुजरते हुए नगर पंचायत , नगर पालिका एवं संसदीय , विधानसभा क्षेत्रो के विकास की जरूरतो मे किसी भी प्रकार का कोई दरकार नही होना चाहिए । अलबत्ता हर कार्यकाल के रोजमर्रा के लिहाज वाले विकासशील लाभकारी योजनाओ के बेहतर क्रियान्वयन मे सड़क , नालियो तक की दरकार बनी हुई है ।