सोशल आडिट को चढ़ी वित्तीय विचलन की खुमारी !
सोशल आडिट को चढ़ी वित्तीय विचलन की खुमारी !
सन्त कबीर नगर { मेहदावल } वित्तीय वर्ष 2022 - 2023 की हो रही सोशल आडिट मे पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही के मूल उद्देश्य के साथ परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे भ्रष्टाचार के रोकथाम की सारी कवायदे उदासीनता के भेंट चढ़ती जा रही है । सक्षम अधिकारियो की लापरवाहिया कही जाय कि या कुछ और कहा जाय सोशल आडिट की विश्वसनीयता मे न सोशल आडिट की नियमावलिया काम कर रही है और न ही सक्षम अधिकारियो का कोई आदेश काम कर रहा है । नतीजतन सोशल आडिट टीमो को अधिकतम वित्तीय विचलन मे सामाजिक अंकेक्षण का वारा - न्यारा कर दिया जा रहा है । जिसके चलते पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही का अस्तित्व ही खतरे मे पड़ गया है । ऐसे मे अगर कोई चोर - चोर मौसेरे भाई का उलाहना देकर भ्रष्टाचार , अनियमितता को अजेय होने की बात कही जाने लग जाय तो कोई अतिश्योक्ति नही होनी चाहिए ।
उल्लेखनीय है कि विकास खण्ड मेहदावल मे हो रहे सोशल आडिट को उदासीनता का अभिशाप लग गया है । कदाचित सोशल आडिट टीमो को प्रखण्ड के किसी भी सम्बन्धित अधिकारी द्वारा कोई सहयोग नही किया जा रहा है । चाहे भौतिक सत्यापन मे परियोजनाओ के मानक व माप आदि का मामला हो चाहे पत्रावली व अभिलेखो के साथ खुली बैठक मे ग्रामीणो के बीच पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही को सुनिश्चित करने का आडिट का मूल उद्देश्य हो । बतौर उदाहरण ग्राम पंचायत हरपुर है जहां 1 करोड़ 4 लाख 4 हजार 932 { नौ सौ बत्तीस } रूपये की व्यय राशि मे 72 परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे न कोई अभिलेख उपलब्ध कराया गया और न ही अपनी जिम्मेदारी की गंभीरता का भान कराया गया । सोशल आडिट टीम द्वारा वित्तीय विचलन मे सामाजिक अंकेक्षण का आयोजन कर औपचारिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए कही न कही अनियमितता आदि को छुपाने मे सहयोग करने का काम किया गया । इसके पूर्व के वित्तीय वर्ष 2021- 2022 के 58 लाख से अधिक की व्यय राशि मे 42 परियोजनाओ के सोशल आडिट मे कोई अभिलेख उपलब्ध नही कराया गया था । जबकि सूत्रो की माने तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खेल खेला जाता है । वही बैठक के दौरान भी भ्रष्टाचार की बात ग्रामीण के बीच से भी कही गई । कई परियोजनाओ पर फर्जी तरीके से धन का बंदरबाट किया गया । ग्रामीणो का यह भी कहना रहा है कि ग्राम पंचायत मे कभी कोई खुली बैठक नही होती है । वही ग्राम पंचायत की कुल आबादी 1700 सौ है लेकिन यहां रोजगार सेवक नही है । पर्यवेक्षक के नाम पर सक्षम अधिकारी की नियुक्ति महज खाना पूर्ति की जिम्मेदारी बनकर रह गई है । बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान का खासम खास मनरेगा मजदूर राम मिलन द्वारा किया गया । जिसके मुताबिक वह ग्राम प्रधान का बेहद शुभ चिंतक है और वह 230 रूपये की मनरेगा मजदूरी मे मेट की जिम्मेदारी निभाता है । चुनाव मे भी ग्राम प्रधान का भरपूर सहयोग किया जाता है । जबकि सोशल आडिट मार्ग दर्शन के मुताबिक सोशल आडिट बैठक की अध्यक्षता किसी सम्भ्रांत व्यक्ति यथा संभव जाब कार्ड धारक जिसने किसी वित्तीय वर्ष मे कम से कम 15 दिन काम हो के द्वारा किया जाना चाहिए ।