।। स्वतंत्रता दिवस ।। भारतीय एकता चित्रकला स्पर्धा का हुआ आयोजन
।। स्वतंत्रता दिवस ।। भारतीय एकता चित्रकला स्पर्धा का हुआ आयोजन
धार्मिकता, समाजिकता एवं एकता का एक ही स्वरूप मोहब्बत है = अब्दुल्लाह खान
नाशिक = देश के 78 वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय एकता {सामाजिक, धार्मिक, एकता } के उद्देश्य पर महाविद्यालय के विद्यार्थियो के बीच चित्रकला स्पर्धा का आयोजन हुआ । स्पर्धा का आयोजन सामाजिक संगठन संविधान प्रेमी नाशिककर, एम्स चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया गया । कार्यक्रम का नेतृत्व रिलेक्सो डोमस्वेयर कम्पनी निदेशक अब्दुल्लाह खान द्वारा किया गया । चित्रकला स्पर्धा मे कुल 1180 विद्यार्थियो ने भाग लिया । मुख्य अतिथि पुलिस उपायुक्त {डीसीपी} प्रशान्त बच्छाव व वरिष्ठ पत्रकार निरंजन टकले द्वारा पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया । इसके पूर्व भारतीय एकता रैली निकाली गई । जिसमे छोटे - छोटे बच्चे बच्चियां धर्म गुरुओ के वेशभूषा मे मन्दिर , मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च व बौद्ध मठ मे जाकर भारतीय एकता का झांकी प्रस्तुत किया एवं धर्म गुरुओ से धार्मिकता, समाजिकता एवं एकता का उपदेश ग्रहण किया । चित्रकला के माध्यम मे देशप्रेम, प्रेम बंधुत्व, भाईचारे का चित्रण किया गया ।
भारतीय एकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक अब्दुल्लाह खान ने कहा कि भारतीय एकता मजामीन का उद्देश्य सामाजिकता, धार्मिकता और एकता है । जिसके इर्द - गिर्द कह लीजिए या फिर दामन कह लीजिए । हम सबका जीवन इसी के दरम्यान व्यतीत होता है । जब हम समाजिकता की बात करते है तब हम यह साबित करने की कोशिश करते है कि हमारे अन्दर विभिन्न संस्कृतियो का समावेश है जब हम धर्म की बात करते है तब हम यह दिखाने की कोशिश करते है कि हमारे अन्दर सभी के लिए अमन चैन की दुवाये और मोहब्बत है जब हम एकता की बात करते है तब यह जताने की कोशिश करते है कि हमारे अन्दर जाति समुदाय से ऊपर उठकर भारतीयता का स्वरूप है । लेकिन क्या हम वाकई मे इसके कायल है ? क्या हमे भारतीयता मे सबका समावेश नही देखना चाहिए ?
ये सभी समावेशो का मोहब्बत ही है जो हमे भारतीय बनाते है इसलिए हम सबका पक्ष मोहब्बत होना चाहिए ।
इसी क्रम मे कारगिल योद्धा साजिद पिंजरी, वरिष्ठ पत्रकार निरंजन टकले किरण मोहिते, मौलाना सलीम आदि द्वारा भारतीय एकता पर जोर देते हुए समतावादी, अखण्ड भारत, समृद्ध भारत की बात कही । उन्होने कहा कि जिस बेहतर समाज की हम सोच रखते है उसे साकार रूप देना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है ।