देश के भविष्य हो इसका हमे भरोसा = अब्दुल्लाह खान

देश के भविष्य हो इसका हमे भरोसा  = अब्दुल्लाह खान
 

बच्चो ने किया प्रतिभा और कला का प्रदर्शन


बस्ती ( रुधौली ) आप लोग देश के भविष्य हैं आप ब्रिफ करना शुरू करो, आंखे खोल कर सपना देखना प्रारंभ करो, बनना क्या है ? चाहते क्या हैं ? जो चाहोगे वो बन सकते हो । इसके लिए पैसा कहां से आयेगा ? कैसे बनेंगे ? ये सब सोचना छोड़ दो । तुम चाहो तो सुनीता विलियम्स जैसा स्पेच मे जाकर नौ- नौ महीना रहकर भी आ सकते हो, टाप क्लास के साइंटिस बन सकते हो । इसके लिए न पैसे का अभाव रोकेगा और न ही कोई रुकावट । आज तुम्हे सिर्फ कोशिश करनी है सोचने भर की, साइंस के जो हमारे टीचर बताते थे उस पर मुझे यकीन नहीं होता था । मै सोचता था बिजनेसमैन बनू, आज हमारी कंपनी रिलेक्सो का बेवसाइट देखे तो बहुत बड़ी दिखती हैं । इसी स्कूल का एक स्टूडेंट्स होने के नाते मैं बोलता हूं कि जो जिंदगी को मजाक समझता है उसकी जिंदगी मजाक बन कर रह जाती हैं । देश के भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम जी यही बोलते थे कि तुम रास्ते पर चलोगे, थोड़ी मुश्किलें आयेगी , थोड़ा रोना भी पड़ेगा, कुछ तकलीफ भी होगी । प्रिय बच्चों ! तुम क्या हो इसका कोई मतलब नही, जो बच्चा जो सोचेगा यह प्रकृति उसे दे देगी, इसमें सब चीजे मौजूद हैं । हवा मे सब भरा हुआ है लेकिन वो दिखता नहीं है । प्रिय बच्चों ! जो तुम्हे बनना हैं उसे चेंज मत करो आईएएस तो आईएएस, आईपीएस तो आईपीएस, इंजीनियर तो इंजीनियर, डाक्टर तो डाक्टर, एडवोकेट तो एडवोकेट, एक दिन तुम अपने लक्ष्य पर पहुंच कर रहोगे । 
उक्त बातें रिलेक्सो डोमस्वेयर कंपनी निदेशक अब्दुल्लाह खान ने कही आज वे शिक्षा खण्ड रुधौली के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोठवा मे शिक्षा के महत्व मे बच्चो के प्रतिभा और कला प्रदर्शन को देखने पहुंचे थे । जहां बच्चो द्वारा बनाए गए एलईडी सामान की मदद से बनाए गए प्रोजेक्ट को देखा गया और उनसे संबंधित प्रश्न पूछे गए तथा हौसला अफजाई किया गया एवं सुझाव दिया गया । 
दौरान एंजल, प्रिया, रिया, फरहीन, आंचल, शिवम, राजन, हरिकेश, अतुल, विजय लक्ष्मी, लक्ष्मी, दिव्यांशी, ज्योति, साधना वर्मा, शाहीन, शाहीन सबा, खुशनुमा, अभिमन्यु, शैलेश, मनीषा आदि बच्चो ने अपनी प्रतिभा दिखाई ।
उन्होंने कहा कि हमारे लिए शिक्षा कितना जरूरी है । इसके लिए हमे बाल्यावस्था से ही ग्रहण करना पड़ता है । अल्पाहारी होना पड़ता है नीद त्यागना पड़ता है चेष्टा करना पड़ता है ध्यान केन्द्रित करना पड़ता है । गर माता - पिता पढ़ाने मे असमर्थ हुए तो नीति उन्हे वैरी बना देता है ।
शिक्षा कितना जरूरी है हम सब के जीवन के लिए । हमारा भविष्य इसी से बनता है,
इसलिए पढ़ाई पर ध्यान दो ।
अगर हम शिक्षा की दृष्टि से बाल्यावस्था को देखे तो आश्चर्य इस बात का होता है कि जीवन के इस अभिन्न अंग को बाल्यावस्था मे क्यो जरुरी माना गया है यह तो बड़े अंग का हिस्सा है इससे ही हम जीवन को संवारते है बेहतर समाज का निर्माण करते है और विकास पथ को सुलभ बनाते हुए बिभिन्न प्रकार के क्रियाकलाप और योगदान देने का काम करते हैं । फिर ये बाल्यावस्था मे ही जरूरी क्यो माना गया है । यह तो जीवन के बड़े संघर्ष का हिस्सा है । जैसा कि देखा भी जाता हैं खासकर हमारे वैज्ञानिकों के संघर्ष जो इनके किसी अनुसंधान मे वर्षो का समय लग जाता हैं । आज उन्ही संघर्षों की देन हैं कि हम सफलता के मार्ग मे आसमान छू रहे हैं ।
दृष्टि कितनी कठिन लगती हैं लेकिन नही बाल्यावस्था से शिक्षा इसलिए जरूरी होता है कि इस दरम्यान जो हम शिक्षा ग्रहण करते है वह न केवल हमे आत्मनिर्भर , स्वावलंबी बनने के मार्ग मे मजबूत बनाने का काम करता है बल्कि जीवन के सफलता मे हमारे कैरियर का राह आसान करता है । हमारे पास पर्याप्त समय होता है । हमारी बौद्धिक क्षमता का विशेष काल है । इसीलिए इसे बाल्यावस्था से ही जरूरी माना गया है ।
निदेशक ने कहा कि जिस तरह शिक्षा ग्रहण करते हुए खोज करने की कोशिशें की जा रही हैं यह ये बताता है कि आप लोग बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिसके प्रोगेश मे कोई रुकावट नही आनी चाहिए । यही शिक्षा का तात्पर्य है । आप लोग बेहतर शिक्षा गुणवत्ता परक शिक्षा ग्रहण करे । इसमे न केवल आप के माता- पिता के उम्मीदे है बल्कि एक बेहतर समाज और देश की समृद्धि का भविष्य है जिसका वक्त के दामन मे आप लोगो का इंतजार है । आप लोग अपने उज्जवल भविष्य और देश के विकास के भरोसा है ।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

।। लकी ड्रा ।। रिलेक्सो के सैकड़ों बने विजेता

स्वस्थ होकर लौटी जिला कोआर्डिनेटर ने किया कार्यभार ग्रहण

खड़ंजे पर हुआ चकरोड मिट्टी कार्य !