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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आदर्श गांव बनाने की गांव वालो ने की पहल

 आदर्श गांव बनाने की ग्रामीणो ने की पहल हमारा वोट ही हमारा विकास है - ग्रामीण सन्त कबीर नगर [ बेलहर कला ] हमारा गांव आदर्श हो , लोग मिलकर विकास की मुख्यधारा मे जुड़े । सरकारी योजनाओ का क्रियांवयन ईमानदारी से हो पात्र - अपात्र की सही पहचान हो , किसी को किसी बात को लेकर शिकवा शिकायत न हो , कोई भी समस्या का निदान प्रेम पूर्वक आपसी बातचीत से हल हो और लोग भाईचारे मे रहे बतौर मंशा आदर्श गांव बनाने की नीयत से बरगदवां कला ग्राम पंचायत के गांव वालो ने आपसी विचार - विमर्श  कर एक मत होते हुए प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी किसे दिया जाय पर विचार किया । एक आवश्यक बैठक कर गांव वालो ने आदर्श गांव को लेकर अपने - अपने विचार प्रस्तुत किये । सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया कि चुनाव मे होने वाले अनर्गल खर्च को रोका जाय , रूपये पैसे लालच आदि के बूते खेली जा रही वोट बैक की राजनीति के चक्कर मे किसी भी ग्रामीण भाई परिवार को नही आना है । हमारा ग्राम प्रधान अच्छा होगा तो विकासशील लाभकारी योजनाओ का लाभ हमारे ही गांव हमारे ही गांव वालो को मिलेगा । हमे अपने वोटो की कीमत को समझना होगा , हमारा वोट ही हमारा विक...

मादकता की दुनिया मे भक्ति स्वरूपा होली !

 मादकता की दुनिया मे भक्ति स्वरूपा होली !  ▪बुद्धि लुम्पती यद् द्रव्यं मदकारी तदुच्यते▪ जी एल वेदांती सन्त कबीर नगर - कितने आश्चर्य की बात है कि भक्ति की पराकाष्ठा पवित्रतम पर्व होली को रंगोत्सव के बीच तामसी मादक पेय के साथ मनाया जाने लगा है । यकीनन ये बड़े खेद की बात है आज इस पवित्रतम पर्व को मांस मदिरा के पटल पर मनाया जा रहा है ।  विदित हो कि होली का पर्व भगवान विष्णु भक्त प्रहलाद की उस भक्ति की कठिन परीक्षा का परिणाम है जो हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने अपनी वरदानी शक्ति को प्रहलाद के ऊपर प्रयोग कर भक्ति को जलाने की कोशिश की थी । शास्त्रो के मुताबिक यह ऐसी शक्ति थी जिससे होलिका जलती नही थी । यह प्रयोग होलिका को तब करना पड़ा जब हर तरफ से हिरण्यकश्यप नाकामी का स्वाद चख चुका था । अपने ही पुत्र प्रहलाद से उसकी भक्ति से पीड़ा थी उसका मानना था जो कुछ हूं मै ही हूं लोग हमारी पूजा करे । इसी मानसिक पीड़ा के चलते प्रहलाद को धधकती आग पर रखी कड़ाही के खौलते तेल मे डाल दिया था पर जैसा कि " समोSहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योSस्ति न प्रिय :। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् ॥ ...

विश्व जल दिवस महज औपचारिकता नही

 विश्व जल दिवस महज औपचारिकता नही जी एल वेदांती सन्त कबीर नगर - बेशक शिक्षा सफलता का द्योतक है हम जो भी विकास करते है उसमे शिक्षा का ही महत्व होता है चाहे उत्कृष्ट समाजिकता संस्कार की बात हो , चाहे भौतिक जीवन विकास की बात हो या फिर आध्यात्मिकता की बात हो । लेकिन शिक्षा केवल विकास का ही द्योतक नही है बल्कि सजगता जागरूकता आदि का भी द्योतक है । अन्यथा जल संरक्षण के नीयत उद्देश्य से तीन हिस्सा पानी के इस धरती पर आज " विश्व जल दिवस " नही मनाया जाता । तीन हिस्सा पानी के बीच जल संरक्षण की बात भले ही किसी कारण वश विडम्बना स्वरूप लगे । लेकिन यह सत्य है कि जल संरक्षण की आवश्यकता हमारे और जरूरी चीजो से कही अधिक है । यही वह कारण है जो सरकार द्वारा चलायी जा रही पेयजल योजना का जल संरक्षण एक आवश्यक अंग है । ऐसे मे एक गौर करने वाली ये बात जरूर है कि जब पेयजल योजना का जल संरक्षण एक अभिन्न अंग है तब पेयजल , जल संरक्षण , जल ही जीवन है , हर घर नल हर घर जल को लेकर जल निगम पेयजल योजना को उदासीनता का चादर ओढ़ा रहा है । जल जीवन मिशन के अन्तर्गत स्वीकृत वर्ष 2014 / 15 से 2020 दरम्यान के जनपद मे पैसठ पे...

समाजसेवा ने बिखेरे कर्मफल के सिद्धांत

 समाजसेवा ने बिखेरे कर्मफल के सिद्धांत  रुतबे के आगे झुक जाती है समाजसेवा जी एल वेदांती सन्त कबीर नगर - वैसे तो " जैसी करनी वैसी भरनी " कर्मफल के अटल सिद्धात है लेकिन परिवर्तनशील इस संसार के क्रिया फल मे कब अन्तर हो जायेगा कुछ कहा नही जा सकता । जिसका उदाहरण समाजसेवा के रास्ते तय होने वाला राजनैतिक सफर है जहां अपनी समाजसेवा के बूते लोग विषम परिस्थिति के हवाले हो जा रहे है वे चाह कर भी वह समाजसेवा नही कर पा रहे है जो कभी उनके रग - रग मे हुआ करता था आज वह सहानुभूति , भाईचारा , प्रेम बंधुत्व भूलने को विवश है ।  उल्लेखनीय है कि सत्कर्म रूप समाजसेवा का प्रतिफल राजनीति हो गया है जो लोग समाजसेवा के रथ पर आरूढ़ हो रहे है वो फल स्वरूप राजनीति की दुनिया मे चले जा रहे है । वहां जाकर वह वही कर रहे जो समाज सिद्धांत नही कहता है जिसका उदाहरण असमाजिकता के तौर पर बहुतायत रूप मे देखा जा सकता है । समाजसेवा के रास्ते राजनीति का जो सफर तय हो रहा है उसमे समाजसेवा का अभाव बड़े पैमाने पर हो रहा है । जो समाजसेवा पहले ढूढ़ कर किया जाता था अब वह मांगने पर भी नही किया जाता , इसकी पराकाष्ठा तब और कहानी स...

जीवन खोने वाले बने प्रत्याशियो के हार - जीत के नतीजे ▪संवेदनाओ का अन्त▪ जी एल वेदांती सन्त कबीर नगर - मानव जीवन की उत्कृष्टता कहा जाय या कुछ और कहा जाय । होने जा रहे त्रिस्तरीय चुनावी समर मे उतर रहे प्रधान पद के प्रत्याशियो द्वारा प्रतिद्वंदिता इस कदर दिखाया जा रहा है जहां संवेदनाओ का अन्त हो जा रहा है । जो लोग अपने जीवन का अंतिम सफर पूरा कर रहे है वे प्रत्याशियो को एक वोटर के सिवा कुछ और नजर नही आ रहे । यह तब हो रहा है जब विश्वास के पटल पर विकास पुरुष बनकर ग्राम पंचायतो का प्रतिनिधित्व करना है । जिसके कन्धे पर केवल सरकारी विकासशील लाभकारी योजनाओ से ग्राम पंचायतो का विकास ही करना नही है बल्कि ग्राम पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय के शिक्षा समिति का अध्यक्ष बनकर बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दायित्व निर्वहन करना है गांव मे होने वाले संस्कृतियो मे सद्भावना भाईचारे का सन्देश देना है । उल्लेखनीय है कि त्रिस्तरीय चुनावी समर मे अपना प्रतिनिधित्व कायम करने उतरे प्रधान पद के प्रत्याशियो को वोटरो को सहेजने के साथ - साथ कौन मतदाता कहां जा रहा है उसे इतनी गम्भीरता से देख रहे है कि जीवन का अंतिम सफर पूरा कर चुके लोग हार - जीत के तौर पर वोटर नजर आ रहे है । एक तरफ जहां मृतक को विपक्ष का वोटर मानकर अन्दर ही अन्दर खुशी मनायी जा रही है वही दूसरी तरफ अपना वोटर मानकर दुःख जताया जा रहा है ।

 जीवन खोने वाले बने प्रत्याशियो के हार - जीत के नतीजे ▪संवेदनाओ का अन्त▪  जी एल वेदांती सन्त कबीर नगर - मानव जीवन की उत्कृष्टता कहा जाय या कुछ और कहा जाय । होने जा रहे त्रिस्तरीय चुनावी समर मे उतर रहे प्रधान पद के प्रत्याशियो द्वारा प्रतिद्वंदिता इस कदर दिखाया जा रहा है जहां संवेदनाओ का अन्त हो जा रहा है । जो लोग अपने जीवन का अंतिम सफर पूरा कर रहे है वे प्रत्याशियो को एक वोटर के सिवा कुछ और नजर नही आ रहे । यह तब हो रहा है जब विश्वास के पटल पर विकास पुरुष बनकर ग्राम पंचायतो का प्रतिनिधित्व करना है । जिसके कन्धे पर केवल सरकारी विकासशील लाभकारी योजनाओ से ग्राम पंचायतो का विकास ही करना नही है बल्कि ग्राम पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय के शिक्षा समिति का अध्यक्ष बनकर बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दायित्व निर्वहन करना है गांव मे होने वाले संस्कृतियो मे सद्भावना भाईचारे का सन्देश देना है ।  उल्लेखनीय है कि त्रिस्तरीय चुनावी समर मे अपना प्रतिनिधित्व कायम करने उतरे प्रधान पद के प्रत्याशियो को वोटरो को सहेजने के साथ - साथ कौन मतदाता कहां जा रहा है उसे इतनी गम्भीरता से देख रहे है कि जीवन...