लाश - ए - कोरोना

लाश - ए - कोरोना

वो जो
लावारिस
पड़ा है़
वह यतीम
नही था
जिन्दगी के
सफर का
फलीभूत
रहबर था
वह कभी
एक तन्हा
नही था
उसका 
हर पल 
सुकूने
सिपर था
उसने नही
की थी
कभी किसी 
दिल को
दुखाने की 
कोशिश
रिश्ते की
हर शर्त को
मंजूर किया था
वह कभी
नही था
उम्मीद से टूटा
उसके यकीं मे
आसमां का
एक जहां था
उसे यकीं था
जो अपने है़
वो नसीब होगे
आखिरी घड़ी मे
कन्धों सहित
खड़े होगे

जी एल वेदांती

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