स्वयं की लड़ाई मे पत्रकार हो रहे गाफिल !

स्वयं की लड़ाई मे पत्रकार हो रहे गाफिल ! 

पत्रकार उत्पीड़न मामले मे नही आया कोई पत्रकार संगठन काम

सन्त कबीर नगर - पूर्व नियोजित हो रहे लगातर पत्रकार सुरक्षा बैठक मे जनपद के पत्रकार गाफिल नजर आ रहे है़ सैकड़ो की संख्या वाले पत्रकारो मे महज बीस - पचीस पत्रकारो की मौजूदगी नजर आ रही है़ । यह शेषांक तब दृष्टिगत हो रहा है़ जब आम बात सी आये दिन पत्रकारो के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है़ कही अनुपयोगी दवा वापिसी को लेकर गुप्ता मेडिकल स्टोर द्वारा विजय गुप्ता जैसे पत्रकार को धमकी दिया जा रहा है़ तो कही दबंगो द्वारा सोहन श्रीवास्तव के जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया जा रहा है़ तो कही घर जाते वक्त चोर उचक्को द्वारा सईद पठान जैसे पत्रकार का मोबाइल छीन लिया जा रहा है़ तो कही प्रशासन द्वारा दर्जनो पत्रकारो के अधिकारो का हनन कर खबर कवरेज से वंचित किया जा रहा है़ तो कही सारे हदो को पार करते हुए सेवा जीवन समर्पित कोरोना संक्रमित वरिष्ठ पत्रकार पवन श्रीवास्तव के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है़ । मसलन हालिया मे बीता निकाय चुनाव पुनर्मतगणना है़ जिसमे प्रशासन द्वारा प्रेस पास भेद दृष्टि अपनाकर अधिकारो का हनन किया गया । प्रशासन का भेद दृष्टि कुचक्र इतना प्रबल था कि अधिकारो से वंचित पत्रकारो का धरना - प्रदर्शन भी कुछ काम न आया । दुर्व्यवहार का अति तब और हो गया जब वैश्विक महामारी कोविड 19 के दूसरे लहर मे कोरोना संक्रमित वरिष्ठ पत्रकार पवन श्रीवास्तव के साथ बदसलूकी तो बदसलूकी जीवन को जीवन न समझकर दुर्व्यवहार के साथ मानसिक तनाव बढ़ाने सहित फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का कदम उठाया गया । ऐसा निंदनीय कार्य उस प्रशासन द्वारा किया गया जिसके लिए पत्रकार समाजहित को देखते हुए समर्पित रहते है़ । ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है़ कि शासन - प्रशासन सहित औरो को आईना दिखाने वाला पत्रकार खुद को आईना के सामने कब लायेगा ? कब वह अपने चेहरे पर पड़ रहे धमकी , कुचक्र , दुर्व्यवहार की झांइ को खत्म करेगा ? क्या उसे इसमे समाजहित की बर्बादी दिखायी नही दे रहा है़ ? आखिर कब पत्रकार एकजुटता का परिचय देने का काम करेगे ?

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

।। लकी ड्रा ।। रिलेक्सो के सैकड़ों बने विजेता

स्वस्थ होकर लौटी जिला कोआर्डिनेटर ने किया कार्यभार ग्रहण

खड़ंजे पर हुआ चकरोड मिट्टी कार्य !