इंसानियत की जिन्दगी जी गया अब्दुल कयूम
इंसानियत की जिन्दगी जी गया अब्दुल कयूम
सन्त कबीर नगर ( बखिरा ) चूंकि जिन्दगी के लम्हों वर्षो - बरस जाती है लेकिन उसके मरतबे कुछ ही लम्हो के होते है जिसका उदाहरण वह नव युवक अब्दुल कयूम है जिसकी जिन्दगी कोई लंबा सफर तो नही कर सकी लेकिन जिन्दगी का मर्तबा बता के चली गयी । अपने छोटे से जीवनकाल को वह सबकुछ देकर चला गया जिसे सैकड़ो वर्षो तक जीने वाला नही दे पाता है । इंसानियत के उसके दौर को लोग भले ही चन्द घड़ी मे भूल जाये पर वक्त इंसानियत के इस स्वरूप को कही न कही जरूर संजोय कर रखेगा । यह और बात है कि उसके विश्वास को वक्त ने जरूर अपने दामन मे समेट लिया लेकिन उसके इरादे को छू भी नही सका ।
उल्लेखनीय है कि बखिरा थानांतर्गत मंझरिया पठान निवासिनी शाहिदा खातून पत्नि वसीउल्लाह को पड़रिया पुल आमी नदी मे डूबते देख दुर्गजोत निवासी अब्दुल कयूम पुत्र मोहम्मद मोबीन उम्र पचीस वर्ष नदी मे कूद गया । पानी की तेज धार मे वह महिला को बचा पाता कि स्वयं डूब गया । हालांकि उसका विश्वास भले ही टूट गया पर उसके इरादे को वक्त छू भी नही सका , एक दूसरे व्यक्ति के सहयोग से डूबती महिला को जिन्दगी मिल गयी । कुछ समय बाद गोताखोरो द्वारा उसके लाश को बाहर निकाला गया ।