सोशल आडिट की कवायद फेल उदासीनता का बोलबाला
सोशल आडिट की कवायद फेल उदासीनता का बोलबाला
विकास नीति मे सत्यापन नीति फेल !
सन्त कबीर नगर - जिस तरह से विकास कार्यो के क्रियांवयन मंसूबे पर अक्सर भ्रष्टाचार का लिपटा चादर दिखायी देता है़ उसी तरह भौतिक सत्यापन एवं जागरूकता के पटल पर पारदर्शिता , सहभागिता एवं जवाबदेही की नीति पर हो रहे ग्राम पंचायत स्तर सोशल आडिट के कर्त्तव्य परायणता मे किंकर्तव्यविमूढ़ता का नजारा देखा जा रहा है़ । न नियम से सोशल आडिट की बैठक की जा रही है़ और न ही मनरेगा से सम्बन्धित विभागो के उदासीनता पर कोई ध्यान दिया जा रहा है़ जिसका उदाहरण जनपद के तीन ब्लाको सांथा , बघौली और हैसर के क्रम मे विकास खण्ड बघौली के ग्राम पंचायत देवकली , ग्राम पंचायत छड़ना एवं ग्राम पंचायत छराछ मे देखने को मिला है़ यहां सोशल आडिट टीम द्वारा बिना मनरेगा सम्बन्धित विभाग के सहयोग के ब्लाक से प्राप्त एम आई एस रिपोर्ट पर सोशल आडिट बैठक सम्पन्न किया गया । यही नही सचिव की अनुपस्थिति को भी गंभीरता से नही लिया गया । सूत्रो की माने तो तीनो ब्लाको का यही है़ । ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है़ कि जब सोशल आडिट ब्लाक से प्राप्त एम आई एस रिपोर्ट पर एवं कोआर्डिनेटर , बी आर पी एवं सहयोगी सदस्यो के साथ सम्पन्न हो सकता है़ तो नियम के दायरे मे रोजगार सेवक , सेक्रेटरी , तकनीकि सहायक , क्षेत्र पंचायत एवं मनरेगा से सम्बन्धित पी डब्ल्यू डी , वन विभाग , नलकूप , सरजू नहर खण्ड 4 , ग्रामीण अभियंत्रण विभाग , जिला उद्यान , भूमि संरक्षण विभाग , ड्रेनेज खण्ड इत्यादि को रखकर सहयोग की जिम्मेदारी क्यो निश्चित की गयी ?
बहरहाल सोशल आडिट टीम द्वारा सोशल आडिट ऐसा किया जा रहा है़ । जो कही न कही आये दिन जन शिकायतो का कारण बन रहा है़ और भौतिक सत्यापन का राज फाश कर रहा है़ । चाहे वह प्रधानमंत्री आवास योजना लाभ मे अपात्रो के भरमार का मामला हो चाहे मीडिया के माध्यम से आधा - अधूरे आवास का पूर्ण भुगतान का मामला हो चाहे मनरेगा से हुए उन कार्यो का मामला हो जिसमे प्रतिवर्ष सैकड़ो की संख्या मे लगने वाले वो पौधे है़ जिन्हे जमीन की नही रोपण अभियान की पड़ी होती है़ ।
उल्लेखनीय है़ कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की धारा - 17 मे सोशल आडिट की व्यवस्था की गयी है़ सोशल आडिट का मुख्य प्रयोजन व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करना , जन - सहभागिता बढ़ाना , कार्य एवं निर्णय प्रक्रिया मे पारदर्शिता लाना एवं जनसामान्य को अधिकारो एवं हकदारी के बारे मे जागरूक करना है़ ।