मृत्यु तो सत्य है फिर किसी की हत्या क्यो ?

मृत्यु तो सत्य है फिर किसी की हत्या क्यो ? 


सन्त कबीर नगर - जीवन काल की एक निश्चित अवधि है कोई कितना भी जतन कर ले पर जिदगी का एक दिन अन्त होना है यह उतना ही कटु सत्य है जितना की " खाली हाथ आया है और खाली हाथ जाना है " की बात सत्य है आज तक कोई धन सम्पदा का एक तनिक भी हिस्सा लेकर कोई गया नही है । जो गया है जो जायेगा वह वो कर्म है जिसे " जैसी करनी वैसी भरनी " जिसे जन्म - जन्मान्तर मे भुगतना निश्चित है । फिर सृष्टिकाल का " बड़े भाग मानुष तन पावा सुर दुर्लभ सब ग्रंथहि गावा ॥ नर तन सम नहि कवनेऊ देहि , जीव चराचर जातत तेहि ॥ इत्यादि महा गौरवशाली महाशब्द उपाधि से संबोधित होने वाला मानव के अन्दर ऐसी राक्षसी प्रवृत्ति क्यो झंडा गाड़े खड़ी है ? क्यो किसी के जिन्दगी को जिन्दगी नही समझा जा रहा है ? कही एक अंगुल जमीन के लिए हत्या तो कही चन्द रुपयो के लिए हत्या तो कही जातीय भावना से हत्या तो कही सामुदायिक भावना से हत्या तो कही वासना के लिए हत्या तो मान - मर्यादा के लिए हत्या तो कही गुरूर के लिए हत्या , जाने कितने तृप्ति के लिए हत्या की जा रही है । क्या इसे करने वाले " मृत्यु सत्य है " के कटु सत्य से अनभिज्ञ है ? क्या वे ये नही जानते कि हर किसी की जिन्दगी का एक निश्चित अवधि है ? मरना तो सबको है कोई आज मरेगा कोई कल मरेगा तो परसो मारेगा तो कोई वर्षो बरस बाद मरेगा पर मरना निश्चित है । और फिर जिन्दगी सीख के इतने इतिहास भरे पड़े है कि हजार वर्ष की जिन्दगी भी उन्हे पढ़ नही सकती है । एक से एक शक्तिशाली सामर्थ्यवान सख्शियत इस पृथ्वी से चले गये जिन्हे भगवान तक कहे जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । जिन्दगी से इतनी नफरत कि अभिरक्षा मे भी मौत के घाट उतार दिया जा रहा है । वे सुरक्षा के पुरोधा भी इसे अंगीकार किये हुए है जो समाज की सुरक्षा मे आपराधिक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की कसम खाये हुए है । वे सरकारे भी इंसानियत को तार - तार करते हुए कही दंगा फसाद तो कही और रूप से जिन्दगी निगल ले रही है ।  जिसके कन्धे पर सबके सुख शान्ति विकास आदि की जिम्मेदारी है वे लोग भी अछूते नही है । जो जीवन नश्वर जगत मिथ्या के विचार उन्नति से सन्यास जीवन की पद्धति अंगीकार कर त्याग की जिन्दगी जी रहे है वे भी हत्या जैसे जघन्य कृत्य के हवाले हो जा रहे है । ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है कि इस हिंसात्मक प्रवृत्ति के पीछे ऐसी कौन सी शक्ति है जिसके सामने विश्व का सबसे श्रेष्ठ जिन्दगी को धारण करने वाला नतमस्तक है । जिसको ज्ञान का दामन भी बचाने मे असमर्थ है ? इसका शोध उस विकास से कही अधिक महत्वपूर्ण है जिसकी लालसा धरती से लेकर आसमान तक पहुंचा दिया है । ऐसे खोज की आवश्यकता है जिसके सेवन से राग , द्वेष , क्रोध इत्यादि अवगुण का जन्म होना बन्द हो जाय ।

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