सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक परिवेश मे महिला शक्ति को दोयम दर्जे का स्थान आज भी क्यो ?
सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक परिवेश में महिला शक्ति को दोयम दर्जे का स्थान आज भी क्यो ?
रीना त्रिपाठी
अगर आप सनातनी परंपरा को मानने वाले हिंदू है तो आपने अपने जीवन मे कभी न कभी दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य किया होगा आपने कभी ना कभी देवी कवचम को जरूर सुना या पढ़ा होगा । निश्चित रूप से ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्रोत ओम के अहलाद से शुरू हुआ देवी कवच का पाठ मनुष्य के अंग प्रत्यंग रोम रोम के साथ उसके बाद आवरण उसके संपूर्ण जीवन की रक्षा के लिए मंत्र रूप मे बनाया गया आइए पाठ की कुछ लाइनो पर गौर करते है ।...........
ॐ नमश्चण्डिकायै।
ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।अस्ति गुह्यतमं विप्रा सर्वभूतोपकारकम्।
दिव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्वा महामुने........
इस संसार मे परम गोपनीय तथा मनुष्यो की सब प्रकार से रक्षा करने वाला है मंत्र कौन सा है ? ब्रह्मन्! ऐसा साधन तो एक देवी का कवच ही है ।
........ श्लोको का हिंदी भावार्थ किया जाए तो कहा गया है तुम्हारी और देखना भी कठिन है । शत्रुओ का भय बढ़ाने वाली जगदम्बिका मेरी रक्षा करो । पूर्व दिशा मे ऐन्द्री इन्द्रशक्ति) मेरी रक्षा करे । अग्निकोण मे अग्निशक्ति , दक्षिण दिशा मे वाराही तथा नैर्ऋत्यकोण मे खड्गधारिणी मेरी रक्षा करे । पश्चिम दिशा मे वारुणी और वायव्यकोण मे मृग पर सवारी करने वाली देवी मेरी रक्षा करे ।
उत्तर दिशा मे कौमारी और ईशानकोण मे शूलधारिणी देवी रक्षा करे । ब्रह्माणि ! तुम ऊपर की ओर से मेरी रक्षा करो और वैष्णवी देवी नीचे की ओर से मेरी रक्षा करे ।
इसी प्रकार शव को अपना वाहन बनानेवाली चामुण्डा देवी दसों दिशाओ मे मेरी रक्षा करे । जया आगे से और विजया पीछे की ओर से मेरी रक्षा करे ।
वामभाग मे अजिता और दक्षिण भाग मे अपराजिता रक्षा करे । उद्योतिनी शिखा की रक्षा करे । उमा मेरे मस्तक पर विराजमान होकर रक्षा करे ।
ललाट मे मालाधरी रक्षा करे और यशस्विनी देवी मेरी भौंहो का संरक्षण करे । भौंहो के मध्य भाग मे त्रिनेत्रा और नथुनों की यमघण्टा देवी रक्षा करे ।
नासिका मे सुगन्धा और ऊपर के ओंठ मे चर्चिका देवी रक्षा करे । नीचे के ओंठ मे अमृतकला तथा जिह्वा में सरस्वती रक्षा करे । कौमारी दाँतो की और चण्डिका कण्ठ प्रदेश की रक्षा करे । चित्रघण्टा गले की घाँटी और महामाया तालु में रहकर रक्षा करे ।
कामाक्षी ठोढी की और सर्वमंगला मेरी वाणी की रक्षा करे । भद्रकाली ग्रीवा मे और धनुर्धरी पृष्ठवंश (मेरुदण्ड) मे रहकर रक्षा करे ।
कण्ठ के बाहरी भाग मे नीलग्रीवा और कण्ठ की नली मे नलकूबरी रक्षा करे । दोनों कंधों में खड्गिनी और मेरी दोनो भुजाओ की वज्रधारिणी रक्षा करे ।
दोनो हाथो मे दण्डिनी और उँगलियो मे अम्बिका रक्षा करे । शूलेश्वरी नखो की रक्षा करे । कुलेश्वरी कुक्षि पेट) मे रहकर रक्षा करे ।
महादेवी दोनो स्तनो की और शोक विनाशिनी देवी मन की रक्षा करे । ललिता देवी हृदय मे और शूलधारिणी उदर मे रहकर रक्षा करे ।
नाभि मे कामिनी और गुह्यभाग की गुह्येश्वरी रक्षा करे । पूतना और कामिका लिङ्ग की और महिषवाहिनी गुदा की रक्षा करे । भगवती कटि भाग मे और विन्ध्यवासिनी घुटनो की रक्षा करे । सम्पूर्ण कामनाओ को देने वाली महाबला देवी दोनो पिण्डलियो की रक्षा करे ।
नारसिंही दोनो घुट्ठियो की और तैजसी देवी दोनो चरणो के पृष्ठभाग की रक्षा करे । श्रीदेवी पैरो की उँगलियों मे और तलवासिनी पैरो के तलुओ मे रहकर रक्षा करे ।
अपनी दाढो के कारण भयंकर दिखायी देनेवाली दंष्ट्राकराली देवी नखो की और ऊर्ध्वकेशिनी देवी केशो की रक्षा करे । रोमावलियो के छिद्रो मे कौबेरी और त्वचा की वागीश्वरी देवी रक्षा करे ।
पार्वती देवी रक्त , मज्जा , वसा , माँस , हड्डी और मेद की रक्षा करे । आँतो की कालरात्रि और पित्त की मुकुटेश्वरी रक्षा करे । मूलाधार आदि कमल - कोशो मे पद्मावती देवी और कफ मे चूड़ामणि देवी स्थित होकर रक्षा करे । नख के तेज की ज्वालामुखी रक्षा करे । जिसका किसी भी अस्त्र से भेदन नही हो सकता , वह अभेद्या देवी शरीर की समस्त संधियो मे रहकर रक्षा करे ।
ब्रह्माणी ! आप मेरे वीर्य की रक्षा करे । छत्रेश्वरी छाया की तथा धर्मधारिणी देवी मेरे अहंकार , मन और बुद्धि की रक्षा करे ।
हाथ मे वज्र धारण करने वाली वज्रहस्ता देवी मेरे प्राण , अपान , व्यान , उदान और समान वायु की रक्षा करे । कल्याण से शोभित होने वाली भगवती कल्याण शोभना मेरे प्राण की रक्षा करे ।
रस , रूप , गन्ध , शब्द और स्पर्श इन विषयो का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करे तथा सत्त्वगुण , रजोगुण और तमोगुण की रक्षा सदा नारायणी देवी करे ।
इन्द्राणि ! आप मेरे गोत्र की रक्षा करे । चण्डिके! तुम मेरे पशुओं की रक्षा करो । महालक्ष्मी पुत्रो की रक्षा करे और भैरवी पत्नी की रक्षा करे ।