संरक्षित गोवंशो के भरण पोषण के लिए अधिकारी कर्मचारी भी करेगे भूसा दान
संरक्षित गोवंशो के भरण पोषण के लिए अधिकारी कर्मचारी भी करेगे भूसा दान
सत्कर्म तो सत्कर्म पुण्य का भी लाभ
सन्त कबीर नगर = भारतीय दर्शनो मे मानव जीवन के प्रकाश मे दान का सर्वाधिक महत्त्व है जिसका उदाहरण बृहदारण्यकोपनिषद मे बड़े ही मार्मिक ढंग से दान करने का उपदेश दिया गया है । प्रजापति पुत्र देव , दानव और मानव द्वारा ब्रह्मचर्यवास करने के बाद क्रमश: देवो ने पिता प्रजापति से कहा कि आप हमे उपदेश कीजिए । प्रजापति ने देवो से " द " अक्षर कहा और पूछा कि समझ गये क्या ? इस पर देवो ने कहा कि समझ गये , आपने हमसे कहा कि दमन करो । तब प्रजापति ने कहा ठीक है तुम समझ गये । फिर प्रजापति से मनुष्यो ने कहा कि आप हमे उपदेश कीजिए । उनसे भी प्रजापति ने " द " अक्षर ही कहा और पूछा कि समझ गये क्या ? मनुष्यो ने कहा " समझ गये , आपने हमसे दान करो ऐसा कहा है । तब प्रजापति ने कहा कि " हां समझ गये । फिर असुरो ने कहा " आप हमे उपदेश कीजिए । उनसे भी प्रजापति ने " द " अक्षर ही कहा और पूछा " समझ गये । तब असुरो ने कहा " समझ गये , आपने हमसे " दया करो " ऐसा कहा है । तब प्रजापति ने " हां , समझ गये ऐसा कहा । भारत के इतिहास मे " दान " जीवंत रूप से हमेशा देखा गया है चाहे वह सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का वचन अनुपालन दान का इतिहास हो , चाहे वह क्षुधा तृप्ति राजा शिवि का दान इतिहास हो , चाहे राजा रघु , राजा बलि व दानवीर कर्ण आदि का इतिहास हो । दान के विषय मे ऐसे विभिन्न प्रकार के उपदेश और जीवंत रूप उदाहरण प्राप्त होते है । जिसके क्रम मे देखा जाय तो संरक्षित गोवंशो के भरण पोषण मे प्रदेश सरकार का दान करने का अपील कही न कही जीवन मे अनुसरण करने पर बल देता नजर आ रहा है ।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की बेहतर नीतियो मे से एक महत्वाकांक्षी योजनांतर्गत आश्रय स्थल संरक्षित गोवंशो के भरण पोषण के क्रम मे अब अधिकारी कर्मचारी भी उनके चारा की व्यवस्था बतौर भूसा दान करेगे । पत्रांक 148 / पशुधन / गोवंश / 2022 _ 23 / दिनांक 23_5_2022 के अनुसार जनपद के अट्ठाइस विभागो से बतौर अपील इक्कीस हजार नौ सौ पचास कुंतल भूसा दान के निसबत लक्ष्य दिया गया है । जिसके अनुपालन मे सभी विभाग लग गये है साथ ही मक्का और नेपियर के माध्यम से पौष्टिक और स्वादिष्ट हरा चारा उपलब्ध कराने वाली एन एम डी केमिकल एण्ड फीड गोरखपुर से सम्पर्क साधा जा रहा है । भूसा दान के इस सुव्यवस्था मे अधिकारियो कर्मचारियो की तरह हर कोई हिस्सा ले सकता है ।