फाइलेरिया जान तो नही लेती पर जीना हराम कर देती है = मुख्य चिकित्साधिकारी डां इन्द्र विजय विश्वकर्मा
फाइलेरिया जान तो नही लेती पर जीना हराम कर देती है = मुख्य चिकित्साधिकारी डां इन्द्र विजय विश्वकर्मा
जन जन को औषधि खाना है
फाइलेरिया को दूर भगाना है
सन्त कबीर नगर = सेन्टर फॉर एडवोकेसी एण्ड रिसर्च सीफार के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन सामूहिक दवा सेवन के तत्वाधान मे स्वास्थ्य संचार सुदृढ़ीकरण हेतु मीडिया कार्यशाला कार्यक्रम का आयोजन सोनी होटल मे हुआ । मुख्य चिकित्साधिकारी डां इन्द्र विजय विश्वकर्मा ने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी देखने मे गंभीर तो नही दिखती है लेकिन इसका दुष्प्रभाव जीना हराम कर देता है । इससे बचने का उपाय बहुत ही सरल है घर की साफ सफाई के साथ गंदे पानियो की निकासी जहां इसके बढ़ते प्रकोप को कम करता है वही मच्छरदानी का प्रयोग और दवा का सेवन सुरक्षा प्रदान करता है । इस बीमारी के रोकथाम के लिए जन जागरूकता के साथ दवा का प्रयोग हर जन को सुनिश्चित करना होगा । फाइलेरिया के दवाई सेवन से कोई साइड इफेक्ट नही होता है । दवा के सेवन से अगर बुखार आता है तो निश्चित रूप से कही न कही फाइलेरिया के लक्षण का संकेत है जिसका जांच कराकर पूरा ट्रीटमेंट कराने की आवश्यकता है । इसके रोकथाम के क्रम मे आशा कार्यकत्रियो के सहयोग से चलने वाला घर घर जन जागरूकता तब तक सफल नही हो सकता है जब तक की प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया का सहयोग न हो । क्यो कि कोई भी अभियान बिना मीडिया बंधुओ के सहयोग से सफल हो नही सकता है मीडिया के सहयोग से ही अभियान जनता के बीच पहुंच कर सफल होता है । अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डां मोहन झा ने कहा कि फाइलेरिया को रोकना है तो सबको दवा खाना है भले ही बीमारी हो या न हो , इसके लिए साफ सफाई के साथ समाज की सहभागिता भी बेहद जरूरी है । इसी क्रम मे फाइलेरिया रोधी दवा के फायदे बताते हुए जिला मलेरिया अधिकारी डां राम सिंह ने कहा कि एम डी ए के दौरान डीईसी व अल्बेंडाजोल के साथ आईवरमेक्टिन दिये जाने से माइक्रोफाइलेरिया जल्दी खत्म करने मे मदद मिलती है । आईवरमेक्टिन खुजली व हुकवोर्म और जू जैसी समस्याओ के खात्मे मे मदद करता है इसके प्रयोग से पेट के अन्य खतरनाक परजीवी भी मर जाते है । वही दवा प्रयोग विधि बताते हुए एसीएमओ वीबीडी डां वी पी पाण्डेय ने कहा कि दो साल से छोटे बच्चे , गर्भवती महिलाये एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियो को यह दवा नही देना है । इस दवा प्रयोग खाली पेट नही करना है । आईवर्मेक्टिन पांच साल की उम्र के बाद ही दिया जाना है । आईवर्मेक्टिन ऊंचाई के आधार पर तथा डीईसी एवं अल्बेंडाजोल उम्र के आधार पर देना है । हर पात्र व्यक्ति को अपने सामने ही दवा खिलाना है ।
इसी क्रम मे सीफार संपादक लोकेश त्रिपाठी , डां एस रहमान , डां मुबारक अली आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त किये ।
कार्यक्रम का संचालन डी पी एम विनीत श्रीवास्तव ने किया ।
बता दे कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्यत: हाथीपांव के नाम से जाना जाता है ।
फाइलेरिया से संक्रमित व्यक्ति भी सामान्य व्यक्ति की तरह दिखता है । संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को को काटकर संक्रमित कर देता है । पैरो व हाथो मे सूजन ( हाथीपांव ) हाइड्रोसील ( अंडकोष का सूजन ) फाइलेरिया के लक्षण है । किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने मे पांच से पंद्रह वर्ष लग सकते है ।