बगीचे मे आई बहार फूल पत्ते सब टहनियां मुस्कुराने लगे
बगीचे मे आई बहार फूल पत्ते सब टहनियां मुस्कुराने लगे
सन्त कबीर नगर = यह और बात है कि जन्म देने वाले माता पिता संतानो को बोझ लगने लगे है । लेकिन इसकी परिभाषा कोई उपवन की उन कलियो पत्ते टहनियो से पूछे जिनका एक समय का तकदीर उन्हे बदनसीबी का राग अलापने के लिए मजबूर कर दिया था । लेकिन जैसे ही साया मिला तैसे ही " राजहंस बिन को करै , नीर क्षीर बिलगाव " ( शिक्षित व्यक्ति के बिना शिक्षा नही मिलती ) के उदाहरण को चरितार्थ करते हुए दुर्भाग्य की घड़ी का चाल ही बदल गया । जो फूल जो पत्ते जो टहनिया अपने तकदीर को कोसने पर मजबूर हो गये थे अब वे इतराने लगे है ।
उल्लेखनीय है कि जनपद मे स्थानांतरित होकर आये विकास भवन उपवन के बागबान मुख्य विकास अधिकारी अतुल मिश्र के आते ही उपवन के भाग्य बदलने लगे है । जो गुल जो पत्ते जो टहनिया मुस्कुराना भूल गये थे वे सुमधुर हवाओ के साथ अब लहराने लगे है । लहराये भी क्यो नही अपनो के बीच कौन खुश नही होता है वह भी जब सृजनहार का छत्रछाया हो । इसका हाल कोई उस भक्त से पूछे जो कभी ये कहते है " हाथ छुड़ाये जात हो निर्बल जानी मोहि , हृदय से निकल जाइये मर्द बखानहु तोहि "