कर्त्तव्य की राह
कर्त्तव्य की राह
अब नही
आसान
किसी को
कर्त्तव्य मार्ग पर
चल पाना ।
हर कदम पर
फिसलन है
मुश्किल है
सफर तय
कर पाना ।
वो और
राही थे
जिनके कंधे
पदचिन्ह
सवारी था ।
एतबारो से
मुफीद मुक्कमल
जिम्मेवारी का
पतवारी था ।
शिक्षा भी
शीश
झुकाता था
सच्चाई भी
सिर
नवाता था ।
ईमानदारी का
दामन भी
दायित्व पथ
लहराता था ।
यही वक्त
तब भी था
यही छांव
आंचल भी था ।
यही चुनौती
तब भी
पथ था
दृष्टिगत
हर ओर
आलम था ।
जी एल वेदांती " कवि "
स्थान विशेषता : सूफी सन्त कबीर दास महानिर्वाण स्थली जनपद मे सेवाकाल का लगभग तेरह महीने का अंतिम दौर जीवन को नया आयाम दिया है " ढाई आखर प्रेम " की अनुभूति होती रही , जब भी अवसर मिलेगा सरजमी का बंदन करने जरूर आऊंगा = सेवा निवृत जिला विकास अधिकारी सुदामा प्रसाद