पखवाड़े मे बहुरा झाड़ू के दिन !
पखवाड़े मे बहुरा झाड़ू के दिन !
सन्त कबीर नगर = जब तक भाग्य साथ नही देता है तब तक पुरुषार्थ भी दम तोड़ता रहता है । ऐसा ही कुछ स्वच्छ भारत मिशन का है । अगर भाग्योदय काल पखवाड़े को छोड़ दिया जाय तो स्वच्छता की सारी प्राथमिकताये सारी सुवयवस्थाये दम तोड़ती मिलती है । चाहे वह ग्राम पंचायत स्तर पर सफाईकर्मियो की तैनातिया हो चाहे कचरो की सुव्यवस्थाओ मे जगह जगह रखे गये डस्टविन हो चाहे ओडीएफ गांव हो और चाहे ग्राम पंचायत स्तर पर बने सामुदायिक शौचालय हो । कदाचितम सबकी हालत एक जैसी है ।
बहरहाल झाड़ू के दिन बहुरे हुए हैं यह और बात है कि गिने हुए दिन है । लेकिन ये गिने हुए दिन किसी ऐतिहासिक पल से कमतर दिखाई नजर आते नही दे रहे है । किसी के इन्तजार की घड़ी जैसे खत्म होते ही भरपूर आनन्द का परिचायक बन जाता है ऐसा ही कुछ झाड़ूओ का भी हो गया है । पखवाड़े का बिगुल क्या बजा तकदीर के नये आयाम दिखाई देने लग गये । सार्वजनिक स्तर पर आज हर कोई झाड़ू को शौभाग्यशाली होने का एहसास करा दिया ।