मानसिक स्वास्थ्य ही व्यक्तित्व विकास का वास्तविक आधार है
मानसिक स्वास्थ्य ही व्यक्तित्व विकास का वास्तविक आधार है
किरण मोहिते
नाशिक = *10 अक्टूबर 2023 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस* के अवसर पर मानसिक स्वास्थ को लेकर भारतीय समाज मे क्या - क्या गलत अवधारणा है , इस बारे मे रोशनी डालना चाहता हूॅ ।
मानसिक स्वास्थ्य को अंग्रेजी मे *मेंटल हेल्थ* कहा जाता है , मानसिक स्वास्थ्य के मामले मे भारतीय समाज आज भी बहुत पिछड़ा हुआ है , लेकिन मानसिक स्वास्थ्य की हजारो वर्षो की भारतीय परंपरा गायब हो रही है । भारतीय समाज मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई सारी गलतफहमी है । मैं यह लेख यह समझने के इरादे से लिख रहा हूं कि यह गलतफहमियां समझकर हम एक अच्छा मानसिक स्वास्थ कैसे हासिल कर सकते है ?
पिछले कई वर्षो से मै व्यक्तित्व विकास , अध्ययन कौशल्य , भाषण कौशल , दिमागी शक्ति विकसित करना , टीम निर्माण , बच्चो और माता - पिता के बीच संबंध जैसे विभिन्न विषयो पर प्रशिक्षण आयोजित कर रहा हूं । इस प्रशिक्षण मे छात्र , माता - पिता , शिक्षक , सरकारी कर्मचारी , कार्यकर्ता और महिलाये शामिल होती है । जब विभिन्न क्षेत्रो और उम्र के लोग प्रशिक्षण लेते है । फिर उनमे से कुछ अलग - अलग मांग करते है जैसे *"सर मै आप से व्यक्तिगत रूप से बात करना चाहता/चाहती हूं"*, फिर व्यक्तिगत रूप से बात करने के बाद पता चलता है कि इस व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया है , और इसे उचित इलाज की आवश्यकता है । वे जो कहना चाहते है उसे सुनने के बाद , मै उस व्यक्ति को बताता हूं कि मेरे पास क्या उपचार है , लेकिन जब कुछ मानसिक बीमारियो को सतही उपचारो से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है , तो उन्हे विशेषज्ञ डॉक्टर के मार्गदर्शन और उपचार की आवश्यकता होती है । जैसे ही मै उन्हे यह कहता हूॅं कि उन्हे ऐसे विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए , जो कि मानसशास्त्र मे विशेषज्ञ है , तो सामने वाले व्यक्ति और उसके रिश्तेदारो के मन मे कई सवाल उठते हैं..? कभी - कभी वे स्पष्ट रूप से कहते हैं , *"अरे उन्हे यह समस्या कई सालो से है , लेकिन वो पागल थोडी हैं..? उन्हे मनोचिकित्सक के पास जाने की आवश्यकता क्यो है ??
यही पर उनकी समस्या हल होने के बजाय और जटिल होत जाती है । मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ना मतलब जैसे की हमे बुखार आया वैसे ही मानसिक स्वास्थ का होता हैं । मानसिक बीमारी शारीरिक बीमारी से कही अधिक कष्टदायक होती है । यह व्यक्ति और उसके आस - पास रहने वाले सभी लोगो के लिए यह परेशानी भरा हो सकता है , इसलिए इसका समय पर इलाज करना जरूरी है ।
किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व जन्म से परिपूर्ण नही होता । साथ ही जन्म के समय किसी भी व्यक्ति का स्वभाव पूर्ण रूप से विकसित नही होता है । हम अक्सर कहते है कि नही " उसका स्वभाव ही ऐसा है " लेकिन यह स्वभाव जन्म के समय नही बनता.. व्यक्ति के घर का वातावरण , स्कूल का वातावरण , वह वातावरण जिसमे वह रहता है , जिस समाज मे उसका जन्म हुआ है , उस समाज की संस्कृति , रीति - रिवाज , परंपराएं और आसपास के लोगो का व्यक्तित्व उसका प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर पड़ता है । इसके अलावा उस व्यक्ति का चरित्र और समग्र व्यक्तित्व उसके बचपन , किशोरावस्था , युवावस्था के दौरान इन विभिन्न चरणो मे हुए अच्छे और बुरे अनुभवो से बनता है । लेकिन इसका मतलब यह नही है कि अतीत मे बने व्यक्तित्व को बदला नही जा सकता है । हमने अक्सर सुना है कि *" स्वभाव मे बदलाव लाने के लिये कोई दवा नहीं है* " लेकिन यह सच नही है... बहुत आसान दवा है *अपने स्वभाव को बदलो..!* और यही मक्खी सूंघती है.. *स्वभाव बदलो...?* *मेरा मतलब है कि कौन किसका स्वभाव बदलना चाहता है..?* अक्सर लोगो को शिकायत रहती है कि " मै मै ठीक हूं.. लेकिन मेरे परिवार के लोग , मेरे कार्यालय के लोग , मेरे पड़ोस के लोग , मेरे समुदाय के लोग , मेरे देश के लोग.. यह ठीक नही है.. मै ठीक नही हूं क्यो कि वे है ठीक नही..!" लेकिन ऐसा नही है । इससे हमारे लिए दूसरो के साथ घुलना - मिलना मुश्किल हो जाता है । और इसका असर आपसी रिश्तो पर पड़ता है इसका प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है , और एक बार जब मानसिक स्वास्थ्य खराब हो जाता है , तो यह मानसिक स्वास्थ्य हमारे शरीर पर प्रभाव डालता है और विभिन्न बीमारियो के माध्यम से रूपांतरित हो जाता है , इस अवसर पर इस वैज्ञानिक कारण को समझना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है । बड़ी - बड़ी बीमारियो से बचे और अपने और दूसरो के लिए सुखद जीवन जिएं.. आइए सोचे कि इसके लिए कुछ ठोस उपाय कैसे किए जाएं...!!!
*अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के कुछ लक्षण*
1) जिनका मानसिक स्वास्थ अच्छा होता है उनका मन बहुत शांत होता है । दूसरो के साथ दोस्ती का रवैया रखना उनका स्वभाव होता है ।
2) अगर कोई उनके खिलाफ जाता है , या उन्हे बदनाम करता है , तो भी उन्हे दुख नहीं होता , वे उनके सवालो और समस्याओ के लिए खुद को जिम्मेदार समझते है और उनका जवाब ढूंढने की कोशिश करते है ।
3) जिनका स्वास्थ अच्छा होता है वह वास्तव मे अपने जीवन मे क्या करना चाहते हैं..? यह वह तय करते है ,
और उनका अपने दिमाग पर नियंत्रण रहता है ।
4) जिनका स्वास्थ अच्छा होता है , वह जीवन की विभिन्न समस्याओ और संकटो से उबरने की क्षमता रखते है ।
5) वे दूसरो से लगातार उम्मीदे नही रखते या अपने जीवन मे अधूरी उम्मीदो के लिए दूसरो को दोषी नही ठहराते ।
6) वे कभी भी अपनी तुलना दूसरो से नहीं करते ।
7) वे दूसरो के पास मौजूद भौतिक सुखो या उन्हे मिलने वाली प्राकृतिक चीजों की तुलना किए बिना खुद का सम्मान करते है और दूसरो का सम्मान करते है ।
8) मैंने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किया , तुमने मेरे लिए क्या किया..? बिना ऐसे प्रोफेशनल रवैये के... मैंने तुम्हारे लिए जो किया वो अपनी मर्जी से किया.. बस्स..यही पर फुलस्टॉप देकर संतुष्ट होते है ।
9) वे खुद को खुश रखने की कोशिश करते है.. इसके लिए वे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नियमित व्यायाम , मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान , सकारात्मक किताबे पढ़ना , सकारात्मक सोच , सकारात्मक लोगो के आसपास रहना , अतीत मे उनके साथ अच्छा और बुरा जो हुआ उस पर लगातार विचार करना जैसे उपाय करते है । बिना बैठे वर्तमान को बेहतर बनाने का लगातार प्रयास करते रहते है । तो उनका भविष्य भी उज्ज्वल है ।
10) उन्हे नही लगता कि दूसरे उन्हे महत्व दे , लगातार उनकी समस्याओ का समाधान करते है , सबका सम्मान करते है , उनसे सवाल करते है , उनकी देखभाल करते हैं... वे हमेशा पहल करते है और दूसरो के आधार पर अपनी समस्याओ को हल करने के लिए तैयार रहते है । एक गतिहीन रवैया मानसिक बीमारी और फिर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर करती है ।
11) वे दूसरो के दोषो की आलोचना करने के बजाय स्वयं क्या कर सकते हैं..? ये अपनी शारीरिक और बौद्धिक शक्ति इसी पर खर्च करते है , अगर किसी व्यक्ति से कोई गलती हो जाए तो ये उसे माफ कर देते है और ठीक से बता देते है ।
12) इस मानसिकता के बिना कि दूसरो को मेरे संपर्क मे रहना चाहिए , मै दूसरो के संपर्क मे कैसे रह सकता हूँ..? वे इसके बारे मे सोचते है ।
13) अच्छे मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग हमेशा नए लोगो से दोस्ती करते है , और अपने जीवन मे लगातार नई चीजे आजमाते रहते है । दूसरी ओर खराब मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग संकीर्ण सोच वाले होते है । वे जिन लोगो को जानते है उनके साथ सहज रहते हैं.. वे खुद को नए लोगो के साथ तालमेल बिठाने का समय नही देते हैं या उस व्यक्ति को समझने की कोशिश भी नही करते है । पिछले कुछ अनुभवो के अनुसार वे उस व्यक्ति का विश्लेषण करने और पूर्वाग्रह के कारण उससे दूर रहने लगते है । उनके साथ अच्छे रिश्ते नही बनते... लेकिन अच्छे मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग नए लोगो से दोस्ती करने , उनके जीवन को समझने और धीरे - धीरे अच्छी दोस्ती बनाने की कोशिश करने मे थोड़ा अधिक समय देते है ।
14) अच्छे मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग अच्छे मे अच्छा और बुरे मे भी अच्छा खोजने की कोशिश करते है ।
16) वे किसी व्यक्ति द्वारा की गई गलतियो या अपराधो के लिए किसी समूह , धर्म या किसी देश के लोगों को दोषी नही ठहराते..उदाहरण के लिए नाथूराम गोडसे ने गांधी को मार डाला , इसलिए जिस समाज मे उनका जन्म हुआ वह समाज बुरा है...ऐसा ग्रह कुछ लोग निर्माण कर रहे है या मुसलमान है आतंकवादी... इस तरह पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का मतलब यह है कि उस व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा नही है ।
17) अच्छे मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग प्यार , दोस्ती , करुणा , दया और सदाचार से भरे होते है , और दूसरो को नीचा नही देखते है । दूसरी ओर , खराब मानसिक स्वास्थ्य वाले लोग बेहद अहंकारी होते है लगातार दूसरो से नफरत करते है , लगातार ईर्ष्या करते है , लगातार शिकायत करना , लगातार नाराजगी , लगातार चेहरे पर अवसाद...लगातार दूसरो को दोष देना और ऐसे व्यक्तियों के आसपास रहने से हमें बचना चाहिए ।
अगर आप इस लेख को दिल से पढ़ेंगे तो निश्चित तौर पर बहुत कुछ सीख सकते है , लेकिन अगर आपका ये नजरिया है कि *"दुनिया गयी भाड मे , मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता"*, तो ऐसी खूबसूरत दुनिया और इंसानों के बीच आपका जन्म होना निरर्थक है...!!!*