कंपलिट करने के नाम पर रोजगार सेवक से सेवन रजिस्टर लेकर ग्राम प्रधान ने रखा अपने घर
कंपलिट करने के नाम पर रोजगार सेवक से सेवन रजिस्टर लेकर ग्राम प्रधान ने रखा अपने घर
ईमानदारी का सामना न कर पाने की दशा मे टी ए सचिव रहे सोशल आडिट से कोसो रहे
सन्त कबीर नगर { सेमरियावा } एक तरफ देश की समृद्धि मे ग्राम पंचायत स्तर पर क्रियान्वित होने वाले परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे सोशल आडिट टीम अपनी विश्वसनीयता को खोती हुई जहां कदाचित को छोड़ निज लाभ मे अनियमितता / भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम रही है वही विकास की नदियां बहाने वाले परियोजनाओ मे सेंधमारी कर ग्राम प्रधान न केवल भ्रष्टाचार मे संलिप्त हो रहे है बल्कि अपनी हनक का प्रभाव दिखाते हुए दूसरे के अधिकार क्षेत्र मे दखलंदाजी कर दायित्वो को रौंदने का काम कर रहे है । जिसका उदाहरण विकास खण्ड सेमरियावा का ग्राम पंचायत लौकी लाला है जहां के रोजगार सेवक हिरामती के मुताबिक ग्राम प्रधान द्वारा सेवन रजिस्टर मांग कर न केवल रोजगार सेवक के अधिकार क्षेत्र पर कब्जा करने का काम किया गया है बल्कि रोजगार सेवक के दायित्व पर कुठाराघात करते हुए सेवन रजिस्टर को अपने मन मुताबिक कंपलिट करने के लिए स्वयं के पास रख लिया गया है । सोशल आडिट बैठक के दौरान रोजगार सेवक हिरामती ने बताया कि सेवन रजिस्टर को कंपलिट करने के नाम पर ग्राम प्रधान इरफान अहमद द्वारा ले लिया गया है । वही सोशल आडिट टीम द्वारा वित्तीय वर्ष के 37 लाख 30 हजार 788 रूपये की कुल व्यय राशि मे सामग्री खर्च 15 लाख 18 हजार 443 रूपये व 10.115 मानव दिवस के सृजन मे 21 लाख 54 हजार 495 रूपये की मजदूरी खर्च का आडिट करते हुए भौतिक सत्यापन के औपचारिक जिम्मेदारी मे 27 परियोजनाओ { 6 मेढ़बंधी , 4 वृक्षारोपण , 2 पोखरा व 1नाला खुदाई , 9 मिट्टी पटाई तथा 5 इण्टरलाकिंग } को क्लीन चिट देने का काम बेखौफ कर दिया गया । न तो पंजीकृत 400 श्रमिक के सापेक्ष 300 मनरेगा मजदूरो का सत्यापन किया गया और न ही जोखन के घर से सेवक के घर तक , इण्टरलाकिंग से प्रकाश के घर तक , हफीजुल्लाह के घर से अफजल के घर तक , याकूब के घर से हबीबुर्रहमान के घर तक तथा वकील के घर से इण्टरलाकिंग तक हुए इण्टरलाकिंग का मानक के अनुरूप भौतिक सत्यापन किया गया । जिससे कही न कही यह स्पष्ट होता है कि सोशल आडिट टीम निज का लाभ साधते हुए न केवल अपनी जिम्मेदारी से मुख मोड़ लिया गया बल्कि परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे की गई मानक की अनदेखी कर कमीशनखोरी मे पनपे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम किया गया ।
होवे भी क्यो नही वित्तीय विचलन के साथ औपचारिक रूप मे होने वाले सोशल आडिट की रीआडिट होने की सारी संभावनाएं पूरी तरह से खत्म जो है ।
जिम्मेदारी मे निभाई गई अपनी ईमानदारी का सामना न पाने की दशा मे टीए , सचिव द्वारा कोई सहयोग नही किया गया और न ही सोशल आडिट टीम को सेवन रजिस्टर उपलब्ध कराया गया और न ही परियोजनाओ से सम्बन्धित अभिलेख आदि उपलब्ध कराये । औपचारिकता के साथ वित्तीय विचलन मे गिने चुने चन्द लोगो मे सोशल आडिट का आयोजन किया गया ।