कानपारा मे हुआ वित्तीय विचलन मे सोशल आडिट

कानपारा मे हुआ वित्तीय विचलन मे सोशल आडिट


सन्त कबीर नगर { सेमरियावा } ऐसे सोशल आडिट कैसे मान्य हो रहे है जिसके चलते सोशल आडिट का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है । जन जागरूकता मे न कोई सहभागिता सुनिश्चित हो पा रही है और न ही परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे बतौर पारदर्शिता एवं जवाबदेही के क्रम मे भ्रष्टाचार / अनियमितता के रोकथाम की कोई जिम्मेदारी सुनिश्चित हो पा रही है । 
उल्लेखनीय है कि प्रखण्ड के ग्राम पंचायत कानपारा मे वित्तीय विचलन मे सामाजिक अंकेक्षण का आयोजन हुआ । दौरान सक्रिय 200 श्रमिको को सत्यापित करने वाला न रजिस्टर उपलब्ध रहा और न ही सभी मजदूर उपस्थित रहे । रोजगार सेवक के पास रहने वाले सेवन रजिस्टर तक को उपलब्ध नही कराया गया । 2 इण्टरलाकिंग के सत्यापन मे टीए द्वारा न ही कोई सहयोग किया गया और न ही संबंधितो द्वारा अभिलेख उपलब्ध कराया गया । जिससे सोशल आडिट टीम साइट पर मात्र फोटो खिंचवाकर भौतिक सत्यापन से इतिश्री कर लिया गया ।
टीम कोआर्डिनेटर गिरीश चन्द्र द्वारा बताया गया कि वित्तीय विचलन मे पंजीकृत 400 श्रमिको के सापेक्ष सक्रिय 200 मनरेगा मजदूरो मे लगभग 23 लाख की कुल व्यय राशि मे 36 परियोजनाओ का आडिट किया जा रहा है । जिसमे 2 इण्टरलाकिंग है शेष 34 परियोजनाओ मे कच्चे काम है । 
परियोजनाओ के शत - प्रतिशत क्रियान्वयन मे वित्तीय अनियमतता के क्रम मे कोई कमी नही बताई गई । जबकि सोशल आडिट का बैठक वित्तीय विचलन मे किया गया । 
ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है कि वित्तीय विचलन मे होने वाले सोशल आडिट को बिना कोई कमी के कैसे क्लीन चिट देने का काम किया जा सकता है ?
रोजगार सेवक के पास रहने वाला बेहद आवश्यक सेवन रजिस्टर मे जब कोई रजिस्टर उपलब्ध ही नही रहा तब उससे सम्बन्धित मामले को क्लीन चिट कैसे दिया जा सकता है ?
तकनीकि सहायक के डी पाण्डेय , सचिव देव प्रताप सिंह अनुपस्थित रहे ।
पर्यवेक्षक की भी जिम्मेदारी नदारद रही , उन्हे भी शासनादेश की कुछ पड़ी नही । 
बहरहाल सोशल आडिट की अध्यक्षता तेज प्रकाश द्वारा किया गया ।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान राजेन्द्र प्रसाद , पंचायत सहायक पूनम सहित टीम सदस्य व कुछ ग्रामीण उपस्थित रहे ।

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