मै विभु हूं
मै विभु हूं
छोड़ कर
यूं तेरा जाना
किसी को
अच्छा न लगा ,
किसी का
कलेजा फटा
किसी का
दुनिया लूटा ,
बता ऐसा
तूने क्यो किया ?
ऐसा मैने
क्या किया
जो खतावार
हो गया ।
किसी का
दिल दुखाना
मेरी फितरत नही ,
मै कब से
किसी का
पतवार हो गया ।
मै तो
इक वह
राही रहा ,
जिसकी मंजिल
सदा
" लोकवत्तु लीलाकैवल्यं "
रहा ।
कुसूरवार
मै न रहा
कभी किसी
और के लिए ,
दिल झांक कर
देख लो
पवित्रता के
गेह मे ,
पाक दामन
हूं मैं
आत्म के रूप मे ।
भूल का
अपने
न इल्जाम
मुझ पर लगाओ ,
कब नश्वर था ?
जो तुमसे
बिछूड़ गया ,
मेरी पहचान
किसी से
छुपी नही ।
मै विभु था
विभु ही रहूंगा
क्यो कि
मै
" नैनं छिन्दंति शास्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनंक्लेदन्त्यापो न शोष्यति मारूत: "
रत्नेश कुमार चौधरी
स्वर्गवास = 18-2-2024