दो दिल एक जान है हम = राजकुमार
दो दिल एक जान है हम - राजकुमार
सन्त कबीर नगर { सेमरियावा } वैसे तो जिदंगी के आयाम आत्मीयता का द्योतक होता है । जिसका विस्तार हम समाजिकता के तौर पर सांस्कृतिक रूप मे ग्राम पंचायत रूप मे जिला रूप मे देश - प्रदेश रूप मे देखते है । जो न केवल समरसता का एकता का भाईचारे का प्रेम बंधुत्व का स्वरुप बनकर जिंदगी के सुख चैन मे सफल होने का पृष्ठिभूमि बनाता है बल्कि आत्मीयता का द्योतक बनकर विकास का मार्ग प्रशस्त करता है । जिसका प्रारंभिक आगाज पवित्र माने जाने वाला वैवाहिक जीवन है जो आत्मीय रूप से जीवन के मर्तबे मे एहतराम होता है । लेकिन अब ऐसा होना और समझना जैसे मानव जीवन के लिए अभिशाप हो गया है लोग अपनी आत्मीयता को तिलांजलि देने मे कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है । भाई - भाई मे अलगाव माता- पिता से अलगाव समाज से अलगाव यहां तक कि पति - पत्नि से अलगाव का आलम बना दिये है । ऐसे मे अब अगर कोई आत्मीयता का परिचय देता हुआ नजर आने लगे तो उसे आश्चर्यचकित रूप से देखने वाली बात तो बनती ही है । जिसका उदाहरण सातवा वर्षगांठ मनाने वाला एक दंपत्ति है जिसने अपने सालगिरह पर न केवल दो दिल एक जान का उदाहरण दिया है बल्कि सामाजिक स्तर पर आत्मीयता का परिचय दिया है ।