सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत रुप है फाग = रीना त्रिपाठी
सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत रूप है फाग- रीना त्रिपाठी
लखनऊ ( अमरेश दर्पण ) होली के पांच यार- फाग, राग, रंग, मस्ती और मल्हार ऐसी धूम मचाते हैं कि होली भुलाए नहीं भूलती । गांव की विविधता का एक विशेष रंग गांव के लोग फाग के माध्यम से होली का गायन करते हैं ।
होली का त्योहार तो कई दिन पहले से धीरे-धीरे आता है धीरे-धीरे सबको रंगों और उमंगों में सराबोर करता चलता है । होली भी केवल रंगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें लोक संगीत, परंपराएं और सामाजिक मेलजोल भी गहराई से जुड़े होते हैं । ये सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत रूप है । हिंदी के बारह महीना में फागुन अंतिम महीना होता है परंतु यह विदाई बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ लोकगीतो की लड़ी से लड़ी जोड़कर एक लंबी वाद्य यंत्रों के साथ होने वाली कहानी के माध्यम से फाग में गांव के बड़े बुजुर्ग एकत्र होकर उत्साहपूर्ण गायन के माध्यम से सबके बीच रखते हैं । "अंत को ही शुभारंभ" मानते हुए भारतीय सनातन संस्कृति उत्साह हर्ष और विविधता के रंग फगुआ के गायन से पूर्ण करती है ।इसके बाद सभी लोग एकत्र होकर होलिका दहन के लिए प्रस्थान करते हैं और वहां पर भी होली माता का गीत और पूजा करने के बाद सभी लोग मिलकर होलिका दहन करते हैं । सुबह सभी लोग एकत्र होकर भाग जाते हुए विभिन्न स्थानों पर देवालय या पौराणिक स्थल रूप कर वहां पर भी फाग के गीत गाकर एक दूसरे से गले मिलते हुए अबीर गुलाल लगाकरआगे बढ़ते हैं । बड़े बुजुर्ग छोटों को आशीर्वाद देते हैं ।
ढोल, हारमोनियम, झज्जर, मृदंग इत्यादि वाद्य यंत्रों के साथ होने वाले फगुआ से मेरा पहला संपर्क प्रधान कनेरी बृजेश कुमार वर्मा द्वारा आयोजित होली उत्सव के आयोजन मेंहुआ । ग्राम कनेरी में आज भी बहुत अच्छा भगवा गाने वाले बुजुर्ग कलाकार मौजूद हैं जिन्होंने पूरी रात फाग तथा लोक संस्कृति के गायन के माध्यम से अगल-बगल के कई गांव के लोगों का मनोरंजन किया और होली के एक दूसरे को बधाई दी इस कार्यक्रम में विकास खंड मोहनलालगंज से धीरू मिश्रा, ललित द्विवेदी, पूर्व ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख मोहनलालगंज विनोद वर्मा, आशाराम नेताजी, सत्यनाम वर्मा, अंशु वर्मा, पिंकू वर्मा, संतोष वर्मा, पूर्व प्रधान लालूराम, गोविंद, राहुल, अवध लाल मास्टर, उदय राज, बाल गोविंद रावत, बालगोविंद रावत, महादेव रावत, पप्पू,राजाराम, जागेश्वर, दिवाकर वर्मा, अंकित रावत, संतलाल ढोलक वादक, मंसाराम, दिनेश कश्यप, गणेश कश्यप, राम लाल इत्यादि ने एकत्र होकर रात भर चलने वाले फगुआ उत्सव का आयोजन किया । मोहनलालगंज के नंदौली गांव का भाग भी बहुत प्रसिद्ध है ।